अपराधियों की पहचान के लिए नया तरीका खोजा
इसके के लिए उपयोग की गई तकनीक में शोधकर्ताओं ने रोशनी और विद्युत्र क्षेत्र के जरिए जीवाणु, विषाणु और डीएनए से युक्त छोटे कणों को विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित किया है।
पर्द्यू विश्वविद्यालय के मेकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर स्टीवन टी. वेरले ने कहा, "इस नई तकनीक के जरिए हम माइक्रोलीटर से लेकर नैनोलीटर तक के आकार वाले कणों को एक जगह से दूसरी जगह पर स्थानांतरित कर सकते हैं।"
मौजूदा तकनीक के जरिए जीवाणु या विषाणु का पता तभी चलता है जब वे मशीन के सेंसर के सामने होते हैं। लेकिन इस नई तकनीक से मशीन के सेंसर को तेजी से जगह बदलने वाले अणुओं की पहचान करने में सक्षम बनाया जा सकेगा।
इस शोध में शामिल विश्वविद्यालय के छात्र आलोक कुमार ने कहा कि इस तकनीक के जरिए सेंसर को अतिआधुनिक बनाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि यह तकनीक भविष्य की प्रयोगशालाओं को एक माइक्रोचिप में समेट लेने की क्षमता रखती है, इस चिप से सभी तरह के बायोलाजिकल टेस्ट किए जा सकेंगे।
इस तकनीक से बने सेंसर्स को खून, मूत्र और अन्य जांचों के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इससे दवाओं की जांच, पितृत्व परीक्षण, हृदय धमनियों से संबंधित बीमारी की पहचान, ट्यूमर और अन्य अनेक बीमारियों की पहचान की जा सकेगी।
वेरले ने कहा कि इस तकनीक का उपयोग डीएनए टेस्ट और अपराधियों की पहचान करने भी में किया जा सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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