भोपाल गैस कांड के 8 आरोपियों को सजा, जमानत पर रिहा (राउंडअप)
प्रत्येक पर 1,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड पर 5,01,750 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
इसी अदालत ने बाद में सभी आरोपियों को 25-25 हजार के मुचलके और इतनी ही राशि की व्यक्तिगत जमानत पर रिहा कर दिया है।
यूनियन कार्बाइड कारखाने से दो-तीन दिसंबर 1984 की रात रिसी विषैली मिथाइल आइसोसायनाइट ने हजारों जिंदगियों को लील लिया था और लाखों लोगों को जिंदगी और मौत के बीच जूझने को विवश कर दिया था। पिछले 25 वर्षो से इस त्रासदी का शिकार बने लोगों के मरने का सिलसिला अब भी जारी है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) मोहन पी. तिवारी ने इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आठ आरोपियों को सजा सुनाई है। सीबीआई की ओर से सी. सहाय और बचाव पक्ष की ओर से अमित देसाई ने दलीलें दीं।
सीबीआई के वकील सी. सहाय से जब आईएएनएस ने पूछा कि सुनवाई में इस हादसे के मुख्य अभियुक्त वारेन एंडरसन का नाम भी आया तो उन्होंने कहा कि एंडरसन फरार है और उसके बारे में अदालत में कोई चर्चा नहीं हुई।
सीबीआई के वकील सी. सहाय ने बताया कि सात आरोपियों केशव महेंद्रा (तत्कालीन अध्यक्ष यूसीआईएल), विजय गोखले (तत्कालीन प्रबंध निदेशक), किशोर कामदार (तत्कालीन उपाध्यक्ष), ज़े मुकुंद (तत्कालीन कर्मचार प्रबंधक), एस.पी. चौधरी (तत्कालीन प्रोडक्शन मैनेजर), के. वी. शेट्टी (तत्कालीन प्लॉट सुपरिटेंडेंट), एस. आई. कुरैशी (तत्कालीन निर्माण सहायक) को धारा 304 ए के तहत दो-दो साल की सजा और एक-एक लाख का जुर्माना लगाया है।
आरोपियों को धारा 336 के तहत 250-250 रुपये का जुर्माना व तीन-तीन माह की सजा, धारा 337 के तहत 500-500 रुपये का जुर्माना व छह-छह माह की सजा और धारा 338 के तहत 1000-1000 रुपये का जुर्माना व एक-एक साल की सजा सुनाई है। वहीं, इस मामले में दोषी करार दी गई कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया (यूसीआईएल) पर कुल 5,01,750 का जुर्माना लगाया गया है।
सहाय के मुताबिक जिन धाराओं के तहत मामला चला था, उनके अनुसार आरोपियों को अधिकतम सजा सुनाई गई है। आरोपियों को जो सजा सुनाई गई है, वह साथ-साथ चलेंगी। वहीं सभी आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी गई है। यह मामला कुल 23 साल सीजेएम न्यायालय में चला, जिसमें 178 गवाहों ने गवाही दी और 258 पेशियां हुईं।
हादसे के तीन साल बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की सहमति से इस मामले को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया और सीबीआई ने 30 नवंबर 1987 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में चालान पेश किया।
इस चालान में वारेन एंडरसन सहित 12 को आरोपी बनाया गया था। यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन अध्यक्ष वारेन एंडरसन फरार है, वहीं अन्य दो कंपनियां यूनियन कार्बाइड कारपोरेशन (यूएसए) और यूनियन कार्बाइड ईस्टर्न इंडिया (हांगकांग) कभी भी अदालत में पेश नहीं हुई, जबकि आर. बी. राय चौधरी की मौत हो चुकी है।
भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने इस फैसले को गैस पीड़ितों के साथ मजाक करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खुश करने वाला और आम आदमी के खिलाफ है। वे इसे गैस पीड़ितों के साथ किया गया एक और विश्वासघात मानते हैं।
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की साधना कार्णिक इस फैसले को भोपाल के लिए काला दिन बताती हैं। उनका कहना है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगे सरकार किस तरह घुटने टेके हुए है, इस फैसले ने जाहिर कर दिया है। भेापाल गैसकांड कोई साधारण हादसा नहीं था और उसके लिए सिर्फ दो साल की सजा उन लोगों का उपहास है, जिन्होंने अपनों को खो दिया है।
इंडो-एशिया न्यूज सर्विस।












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