आर कॉम की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के फैसले को मंजूरी
कंपनी ने अपने बयान में कहा, "रिलायंस कम्युनिकेशन्स के निदेशक मंडल ने कंपनी की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी बेहतर प्रीमियम पर रणनीतिक या निजी निवेशकों को बेचने की मंजूरी दी है।"
जीएसएम और सीडीएमए दोनों ही तरह की मोबाइल सेवाएं दे रही और 10.9 ग्राहक संख्या वाली इस कंपनी के निदेशक मंडल ने रणनीतिक और समेकन के अन्य प्रयासों को भी आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है।
इस निर्णय के लिए अटकलें करीब तीन दिन से लगाई जा रहीं थी। भारत में दूरसंचार क्षेत्र की प्रगति को लेकर आशान्वित यूएई की कंपनी एटिस्लेट ने 3-जी स्पेक्ट्रम नीलामी की बोली दो अरब डॉलर के पार जाने के बाद बोली आगे नहीं बढ़ाई थी।
हिस्सेदारी बेचने की खबरों के बाद बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर रिलायंस कम्युनिकेशन्स के शेयर में 14.03 प्रतिशत की तेजी आ गई थी, सप्ताह के अंत में शुक्रवार को यह 168.15 रुपये पर बंद हुआ।
पिछले सप्ताह अबू धाबी के एक अंग्रेजी दैनिक 'द नेशनल' में खबर प्रकाशित हुई थी कि एटिस्लेट के अध्यक्ष भारत की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी का अधिग्रहण करने की योजना बना रहे हैं।
वर्ष 2008 में एटिस्लेट के 19 देशों में 10 करोड़ ग्राहक थे, इसने स्वान टेलिकॉम में भी 90 करोड़ डॉलर की कीमत की 45 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है।
भारत में कंपनी की सेवाएं एटिस्लेट डीबी के नाम से संचालित हो रही हैं, कंपनी ने भारत में 'चीयर्स मोबाइल' नाम से दूरसंचार सेवाएं लांच की हैं।
पिछले साल जुलाई महीने में एटिस्लेट ने रिलायंस कम्युनिकेशन के साथ 10 साल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग समझौता किया था। यह समझौता 2.2 अरब डॉलर की कीमत में किया गया था।
रिलायंस कम्युनिकेशन पिछले दो साल से विदेशों में रणनीतिक साझेदार की तलाश कर रही है, कंपनी ने अभी अपने साझेदार का खुलासा नहीं किया है लेकिन किसी संभावना से भी इंकार नहीं किया है।
कंपनी ने सही समय पर गतिविधियों का खुलासा करने की इच्छा जताते हुए कहा, "कंपनी अपने शेयर धारकों की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी के लिए कंपनी की नीतियों के तहत इस संबंध में कुछ प्रस्तावों पर विचार कर रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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