भारत चाहे तो जल्दी मिल सकता है सी-17 विमान
लास एंजेलिस, 6 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी वायु सेना को 199वें सी-17 ग्लोबमास्टर-3 मालवाहक विमान की जून के अंत तक आपूर्ति करने जा रही दुनिया की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह भारत को ऐसे विमानों की आपूर्ति निर्धारित समय से कम समय में कर सकती है।
हाल ही में कंपनी ने लांग बिज स्थित अपने निर्माण संयंत्र में भारतीय मीडिया को इस विमान की खूबियों के बारे में जानकारी दी थी।
भारत को संभावित आपूर्ति किए जाने वाले विमानों की पहचान 'ब्लॉक 18' के रूप में की गई है।
कंपनी ने कहा है कि अगले करीब पांच वर्षो में सी-17 कार्यक्रम समाप्त हो जाएगा। इसके तहत अमेरिकी वायु सेना को 223 विमानों की आपूर्ति की जानी है। इस मालवाहक विमान को काफी सफल माना जा रहा है।
बोइंग के ग्लोबल मोबिलिटी सिस्टम के उपाध्यक्ष टॉमी डुनेहेव ने कहा ने कहा कि भारतीय वायु सेना ने सी-17 ग्लोबमास्टर-3 श्रेणी के 10 मालवाहक विमानों को खरीदने का फैसला किया है। ये विमान भारतीय सेना में सेवा दे रहे आईएल-76 मालवाहक विमानों की जगह लेंगे। आईएल-76 रूस निर्मित विमान हैं जिनका उत्पादन अब बंद हो चुका है।
आईएल-76 अप्रैल, 1985 से भारतीय सेना को अपनी सेवा दे रहे हैं और इनके अगले 10-15 वर्षो में सेवा से मुक्त होने की संभावना है।
भारत, अमेरिका के बाद सी-17 विमानों का सबसे बड़ा खरीददार है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ने छह विमानों की आपूर्ति का सौदा किया है।
अमेरिकी सेना के साथ स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर करने के दो से तीन वर्ष के भीतर भारत को पहले विमान की आपूर्ति की जाएगी।
डुनेहेव ने कहा कि एक विमान की आपूर्ति में सामान्य तौर पर तीन वर्ष का समय लगता है लेकिन अगर भारत चाहता है कि आपूर्ति समय में कमी लाई जाए तो हम अन्य देशों की आपूर्ति रोककर नई दिल्ली की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
कंपनी का दावा है कि पायलट की गलतियों और किसी हमले की स्थिति को छोड़कर यह विमान कभी भी दुर्घटना का शिकार नहीं हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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