कुम्हारों की दुआ, देर से बरसो मेघा!
रायपुर, 5 जून (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बाहरी इलाके में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के लगभग 50 परिवार दुआ कर रहे हैं कि उनके यहां बारिश देरी से हो। ऐसा वे दूसरों को हानि पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि अपनी रोजी-रोटी चलाने के उद्देश्य से कर रहे हैं।
मिट्टी के बर्तन बनाने के काम में लगे कुम्हारों के मुताबिक वे यह दुआ इसलिए कर रहे हैं ताकि इस गर्मी में मिट्टी के बर्तन बेचकर वे अपने परिवार के लिए रोजी-रोटी की व्यवस्था कर सकें।
गौरतलब है कि इस समय यहां का तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इन कुम्हारों का व्यवसाय वर्ष के इस समय में काफी अच्छा होता है।
रिंग रोड नंबर एक पर अपने मिट्टी के बर्तनों की बिक्री कर रहीं 32 वर्षीय बिट्टन बाई ने कहा, "हम लोग बहुत गरीब हैं और मिट्टी के बर्तन ही हमारी आय का एकमात्र जरिया है।"
उन्होंने बताया, "पिछले 10 वर्षो की तुलना में इस साल बर्तनों की अच्छी बिक्री हुई है। लोग एक बर्तन की कीमत लगभग 50 रुपये तक दे रहे हैं और हम एक बर्तन पर 32 रुपये का शुद्ध लाभ कमा रहे हैं। मेरा व्यवसाय इस समय अपने चरम पर है और हम नहीं चाहते कि बारिश की वजह से हमारे व्यवसाय को नुकसान पहुंचे।"
लंबी गर्मी के बाद उम्मीद की जा रही है कि जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून यहां पहुंचेगा। कुम्हारों को डर है कि बारिश उनके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाएगी।
बिट्टन बाई जैसे लोगों के लिए गर्मी का मौसम काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उनके पास मिट्टी के बर्तन के अलावा आय का कोई और स्रोत नहीं है।
वह बताती हैं कि मई के पहले सप्ताह में उन्होंने औसतन एक दिन में ही 60 बर्तनों की बिक्री की थी। घरों में फ्रिज रखने वाले काफी धनी लोग भी इस मौसम में मिट्टी के बर्तनों को खरीदकर प्राकृतिक रूप से ठंडे पानी का आनंद लेते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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