इंडियन मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन घोषित (लीड-1)

गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है, "केंद्र सरकार मानती है कि इंडियन मुजाहिदीन अपने प्रमुख संगठनों को सभी जानकारियां देता है और आतंकवादी गतिविधियों में इसका हाथ रहा है।"

इस संगठन को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल कर लिया गया है। सूची में प्रतिबंधित संगठनों की संख्या अब 35 हो गई है।

इंडियन मुजाहिदीन पहली बार उस समय चर्चा में आया था, जब इसने वर्ष 2006 में वाराणसी के कई मंदिरों में हुए विस्फोट की जिम्मेवारी ली थी। इस संगठन ने लखनऊ की एक निचली अदालत पर भी बमबारी की थी। इसके अलावा 23 नवंबर 2007 को उत्तर प्रदेश के फैजावाद व वाराणसी में हमले कर इस संगठन से जुड़े आतंकवादियों ने कई लोगों की जान ली थी।

संगठन ने जयपुर में 13 मई 2008 को 15 मिनट के भीतर नौ बम विस्फोट किए थे, जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए थे और दो सौ से अधिक घायल हो गए थे।

इंडियन मुजाहिदीन ने फिर 25 जुलाई 2008 को बेंगलुरू को निशाना बनाया। वहां लगातार किए गए नौ विस्फोटोंे में दो लोगों की मौत हो गई थी और 20 घायल हो गए थे।

अधिसूचना में कहा गया है कि "भारत सरकार के आदेश के मुताबिक इंडियन मुजाहिदीन के सभी संगठनों एवं संरचनाओं को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल किया गया है।"

इस संगठन में ज्यादातर लोग प्रतिबंधित संगठन हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी (हूजी) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के हैं।

सितंबर 2008 में दिल्ली के जामिया नगर इलाके में बाटला हाउस मुठभेड़ में इंडियन मुजाहिदीन के दो आतंकवादियों को मारा गया था, इस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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