माकपा की बैठक में शामिल नहीं होंगे बुद्धदेव (लीड-1)
कोलकाता में एक माकपा नेता ने बताया कि भट्टाचार्य इस बैठक में भट्टाचार्य भाग नहीं लेंगे, क्योंकि वह 'अत्यावश्यक सरकारी कार्य' में व्यस्त रहेंगे।
इस बीच पोलित ब्यूरो के वरिष्ठ सदस्य एम.के. पंधे ने नई दिल्ली में कहा कि मुख्यमंत्री को राज्य में कानून-व्यवस्था पर नजर रखनी है, इसी वजह से वह बैठक में नहीं आ सकेंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया, "हमने उन्हें सूचित किया है कि उन्हें बैठक में उपस्थित रहना चाहिए, क्योंकि यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है।" जब उनसे पूछा गया कि भट्टाचार्य आएंगे या नहीं तो उन्होंने कहा, "हम उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।"
इस बीच पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने एक टीवी चैनल को बताया कि वह भी मुख्यमंत्री को आने के लिए कह चुके हैं।
करात ने कहा, "राज्य में हो रहीं झड़पों की वजह से मुख्यमंत्री अभी कोलकाता छोड़ना नहीं चाहते हैं।"
उन्होंने हालांकि इस बात से इंकार किया कि पोलित ब्यूरो की बैठक में पश्चिम बंगाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों पर चर्चा होगी।
एक अन्य वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल में हालात 'बहुत गंभीर' हैं और पोलित ब्यूरो की बैठक में इस पर चर्चा होगी।
उन्होंने कहा, "चुनावी नतीजों पर राज्य कमेटी की समीक्षा के बाद ही इस पर चर्चा होगी। पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई गंभीरता से नतीजों की समीक्षा कर रही है।"
रविवार को पश्चिम बंगाल में हुए स्थानीय निकाय के चुनावों में तृणमूल कांग्रस ने प्रतिष्ठित कोलकाता नगर निगम वाममोर्चा से छीन लिया है और मार्क्सवादियों को अन्य 80 नगरपालिकाओं से भी बेदखल कर दिया है।
राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए स्थानीय निकायों के ये चुनाव परिणाम माकपा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
भट्टाचार्य पिछले वर्ष लोकसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद हुई पोलित ब्यूरो की बैठक में भी भाग नहीं लिया था।
मुख्यमंत्री और पार्टी महासचिव प्रकाश करात के बीच मतभेद उस समय भी गहरा गए थे, जब पोलित ब्यूरो ने वर्ष 2008 में मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला लिया था। भट्टाचार्य ने इसे भारी भूल बतया था।
भट्टाचार्य का मानना है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के मुद्दे पर कांग्रेस से सभी नाते तोड़ने के करात के फैसले का खामियाजा पार्टी को चुनावों में भुगतना पड़ा था।
पंद्रह सदस्यीय पोलित ब्यूरो माकपा का सर्वोच्च निकाय है। वर्तमान में पोलित ब्यूरो में 14 सदस्य ही रह गए हैं, क्योंकि पार्टी ने पिछले वर्ष वरिष्ठ नेता व केरल के मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन को पार्टी का अनुशासन तोड़ने के आरोप में इस निकाय से निकाल दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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