रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर फैसला सितंबर तक
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अधिकतम सीमा मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का फैसला सितंबर तक लिया जा सकता है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को उम्मीद है कि एफडीआई की सीमा बढ़ाने के विषय में उसे रक्षा मंत्रालय के विचार जुलाई तक मिल जाएंगे।
औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) द्वारा 17 मई को जारी किए गए दस्तावेज में कहा गया है कि एफडीआई की सीमा बढ़ाने से इस क्षेत्र में अच्छी कंपनियां आकर्षित होंगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
डीआईपीपी के निदेशक दीपक नरेन ने कहा, "एफडीआई नीति के संबंध में सब कुछ सितंबर 2010 तक स्पष्ट हो जाएगा, सितंबर तक सरकार सभी क्षेत्रों में एफडीआई के संबंध में समीक्षा पूरी कर लेगी, इस समीक्षा में रक्षा, रिटेल, दूरसंचार, कृषि आदि सभी क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रस्ताव सरकार की नीति का स्वरूप लेगा क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान सभी हिस्सेदारों की सहमति ली जाएगी।"
नरेन ने एसोचैम के एक आयोजन के दौरान कहा, "फिलहाल यह विचार पत्र डीआईपीपी के एक प्रस्ताव के रूप में है और इसे सरकार का नीतिगत दस्तावेज नहीं कहा जा सकता।"
डीआईपीपी के प्रस्ताव में कहा गया है कि एफडीआई की सीमा 26 फीसदी रहने से वास्तविक उपकरण निर्माताओं से तकनीक का मालिकाना हक लेने में मुश्किल होती है, इसके चलते भारत उच्च गुणवत्ता युक्त आधुनिक तकनीक से वंचित हो जाता है।
इसके अलावा इस प्रस्ताव में एफडीआई की सीमा बढ़ाए जाने के कई फायदे गिनाए गए हैं।
विचार पत्र प्रस्तुत होने के बाद रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने कहा था कि एफडीआई की सीमा 26 प्रतिशत ही रहनी चाहिए लेकिन इसे विशिष्ट मामलों में 49 फीसदी किया जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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