झारखण्ड में राष्ट्रपति शासन के आसार बढ़े (राउंडअप)

राज्यपाल एम. ओ. एच. फारूक ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और झारखण्ड विकास मोचरे-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के नेताओं से मुलाकात कर सरकार गठन की संभावनाएं टटोली। ज्ञात हो कि सोरेन ने रविवार रात मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 31 जून तक का समय दिया गया था।

तीनों दलों ने राज्यपाल को इस बात से अवगत कराया कि सरकार गठन के लिए उनके पास आवश्यक आंकड़े नहीं हैं। सरकार गठन के लिए किसी भी दल या गठबंधन के आगे न आने की स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है।

बहरहाल, इन दलों के नेताओं से मुलाकात के बाद राज्यपाल रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं। संभावना है कि सोमवार देर रात केंद्रीय गृह मंत्रालय को वह अपनी रिपोर्ट सौंपें।

सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अनुशंसा कर सकते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, "झारखण्ड के राज्यपाल ने मुझे बताया है कि वह वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए राज्य के राजनीतिक दलों से चर्चा करने के बाद उन्हें शाम तक जानकारी देंगे।"

भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रघुवर दास ने आईएएनएस को रांची में बताया, "राज्य में वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए हमारी पार्टी का रुख जानने के लिए राज्यपाल ने हमें सोमवार को बुलाया था। हमने उनसे समय मांगा है क्योंकि इस मुद्दे पर फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व लेगा।"

दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी झारखण्ड में सरकार बनाने का प्रयास नहीं कर रही है और स्थिति पर नजर रखे हुए है।

भाजपा नेताओं की बैठक के फौरन बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने भी राज्यपाल से भेंट की।

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रदीप बालमुचु ने संवाददाताओं को रांची में बताया, "हमें सरकार बनाने की कोई जल्दी नहीं है। हम स्थायित्व सुनिश्चित होने पर ही वैकल्पिक सरकार का गठन करेंगे।"

झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी राज्यपाल से भेंट की और राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, "राज्यपाल यदि सरकार गठन की संभावनाएं तलाशेंगे तो कांग्रेस और जेवीएम-पी को सबसे पहले सरकार गठन के लिए बुलाना चाहिए क्योंकि हमारा चुनाव पूर्व गठबंधन था।"

इससे पहले रविवार शाम को सोरेन ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया था। उन्हें सोमवार को 81 सदस्यीय सदन में अपना बहुमत सिद्ध करना था। सूत्रों ने बताया कि झामुमो के 18 में से आठ विधायकों ने विश्वास मत का सामना करने से इंकार कर दिया था।

पिछले महीने लोकसभा में शिबू सोरेन ने बतौर लोकसभा सांसद भाजपा के कटौती प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। इससे नाराज होकर भाजपा ने झारखण्ड में सोरेन सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की थी। इसके बाद से झारखण्ड में राजनीतिक संकट जारी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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