पिछले साल 7.4 प्रतिशत रही विकास दर (राउंडअप)
अर्थव्यवस्था में 7.4 प्रतिशत की यह तेजी इससे पहले लगाए गए 7.2 प्रतिशत की विकास दर के अनुमान से ज्यादा रही है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ)के मुताबिक अर्थव्यवस्था की विकास दर में यह वृद्धि, कृषि, निर्माण और खनन क्षेत्र में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी के कारण हुई है।
सीएसओ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 की पहली तिमाही में विकास दर 6 फीसदी रही थी जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 8.6 फीसदी हो गई। तीसरी तिमाही में विकास दर में तेज गिरावट आई थी इस दौरान अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 प्रतिशत रही लेकिन वर्ष की अंतिम तिमाही में विकास दर एक बार फिर बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गई।
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि उन्हें विकास की यह रफ्तार बनी रहने और मौजूदा वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
वर्ष 2008-09 में देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही थी।
जनवरी-मार्च 2010 में चीन में विकास दर 11.9 प्रतिशत रही है, जो कि उसकी इससे पिछली तिमाही की विकास दर 10.7 प्रतिशत से ज्यादा है।
वर्ष 2009-10 में देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख क्षेत्रों की विकास दर निम्मानुसार रही है। कोष्ठक में इससे पहले साल की विकास दर स्पष्ट की गई है-
-कृषि (1.6 प्रतिशत) 0.2 प्रतिशत
-खनन (1.6 प्रतिशत) 10.6 प्रतिशत
-निर्माण (3.2 प्रतिशत) 10.8 प्रतिशत
-बिजली (3.9 प्रतिशत) 6.5 प्रतिशत
-विनिर्माण (5.9 प्रतिशत) 6.5 प्रतिशत
-व्यापार, परिवहन और दूरसंचार (7.6 प्रतिशत) 9.3 प्रतिशत
-वित्त एवं रियल्टी (10.1 प्रतिशत) 9.7 प्रतिशत
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत विकास दर का अनुमान व्यक्त किया था। सोमवार को जारी संशोधित अनुमान में अर्थव्यवस्था की विकास दर इससे बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गई है। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष और मध्यम अवधि के लिए ज्यादा विकास दर का अनुमान व्यक्त किया गया है।
पिछले सप्ताह आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "हमें मौजूदा वित्त वर्ष में 8.5 प्रतिशत विकास दर की उम्मीद है। मध्यम अवधि में हमने प्रतिवर्ष 10 फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा है। हमारी बचत और निवेश दर को देखते हुए यह लक्ष्य प्राप्त करना संभव है।"
एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स (एसोचैम) का कहना है कि आखिरी तिमाही में देश की 8.6 फीसदी विकास दर के चलते हमें उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में देश की विकास दर कुछ चिंताओं के बावजूद 9 फीसदी के करीब पहुंच जाएगी।
एसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पीरामल ने कहा, "फिलहाल यूरोपीय संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती नहीं है, यदि यह संकट एक स्तर से ज्यादा बढ़ता है तो हमारे विदेशी कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन यह निश्चित है कि हमारे यहां विकास का माहौल बना रहेगा।"
फिक्की के अध्यक्ष रंजन भारती मित्तल ने कहा कि निर्माण क्षेत्र में विकास दर को बनाए रखना 2010-11 में बहुत मुश्किल होगा, इस समय ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने से विकास की गति रुक सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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