पिटाई से न बचाने वाली मां के खिलाफ मुकदमा
उस व्यक्ति का आरोप है कि उसकी मां ने पांच से 19 वर्ष की आयु में समय-समय पर परीक्षा में नाकाम होने के कारण न सिर्फ उसे मारा-पीटा बल्कि पिता की पिटाई से भी उसकी रक्षा नहीं की।
मुकदमा करने वाले व्यक्ति के वकील जस्टिन लिवेंसन ने लंदन में न्यायाधीश को बताया कि एक मां पर बेटे की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठाने की जिम्मेदारी होती है और उस व्यक्ति की मां अपनी इस जिम्मेदारी में नाकाम रही है।
समाचार पत्र 'डेली मेल' ने लिवेंसन के हवाले से लिखा है, "मां होने के नाते उस महिला को अपने बेटे की रक्षा करनी चाहिए थी। उसका मार-पीट करने वाला पति नहीं मानता तो उसे घर से निकाल दिया जाना चाहिए था। यही नहीं, जरूरत पड़ती तो अपने बेटे को मारने के लिए उसे अपने पति को तलाक भी दे देना चाहिए था।"
व्यक्ति ने दावा किया है कि उसके पिता ने पांच से 19 वर्ष की आयु में रोजाना चार बार उसकी पिटाई की थी। उस दौरान वह उसे बेल्ट, छड़ी, बिजली के तार और लकड़ी के ब्रश से मारा करता था।
दूसरी ओर, मुकदमा झेल रही मां का दावा है कि उसका बेटा बढ़ा-चढ़ाकर चीजों को पेश कर रहा है। उसने हालांकि यह स्वीकार किया है कि उसने कई मौकों पर अपने बेटे को चांटा रसीद किया है लेकिन वह उसे नाजायज नहीं मानती। एक बच्चे को अनुशासन के दायरे में रखने के लिए चांटा मारना गलत नहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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