भिण्ड में दलित महिला की भूख से मौत : कांग्रेस
चैाधरी ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया, "85 वर्षीय छोटी बाई को वर्ष 1996 से वृद्घावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा था लेकिन बीते वर्ष उस पर रोक लगा दी गई। इस स्थिति में छोटी बाई की मदद उसके भाई शोकी राम ने की। उसके भी हालात बिगड़ गए और वह बहन की मदद में असमर्थ हो गया। वहीं छोटी बाई लगातार हर मंगलवार को कलेक्टर के कार्यालय में होने वाली जनसुनवाई में अपनी गुहार लगाती रही। मंगलवार 18 मई को भी वह जनसुनवाई में पहुंची, जहां उसकी मौत हो गई।"
चौधरी का आरोप है कि छोटी बाई ने तीन-चार दिनों से कुछ नहीं खाया था तथा उसकी भूख व पानी न मिलने से ही उसकी मौत हुई है। इस स्थिति को प्रशासन ने छुपाने के लिए मृतका का पोस्टमार्टम नहीं कराया। इतना ही नहीं असमय मृत्यु पर मिलने वाले 50 हजार रुपये भी पीड़ित परिवार को नहीं मिले लिहाजा छोटी बाई का अंतिम संस्कार चंदे से किया गया।
छोटी बाई के भाई शोकी राम ने चंबल संभाग के आयुक्त को एक ज्ञापन देकर अपनी बहन की मौत के लिए कलेक्टर (भिण्ड) और जिला प्रशासन के नुमाइंदों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है।
वहीं भिण्ड के कलेक्टर एम आर रघुराज ने आईएएनएस से चर्चा के दौरान कहा कि महिला की स्वाभाविक मौत हुई थी और उसके परिजन भी पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे। इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। वे भूख से मौत की बात को नकारते हैं और कहते हैं कि जहां तक 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का सवाल है वह स्वाभाविक मौत पर नहीं दी जाती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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