इस साल आम नहीं रहेगा 'आम'

आम की पैदावार करने वाले एशिया के सबसे बड़े गढ़ मलिहाबाद व इसके आस-पास के इलाकों में इस साल किसानों पर मौसम की काफी बड़ी मार पड़ी है। मलिहाबाद के किसान मनीष यादव ने दै्टस हिन्दी से बातचीत में बताया कि अप्रैल के अंत में आम की फसल पर कीड़े लग गए। जिस वजह से मलिहाबाद, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर व रहीमाबाद की आधी फसल पहले ही बरबाद हो गई थी। ऊपर से पिछले सप्ताह आंधी की वजह से करीब 30 प्रतिशत कच्चे आम गिर गए।
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मनीष यादव ने बताया कि आंधी तो हर साल आती है, लेकिन जितना ज्यादा नुकसान इस बार हुआ है, पिछले पांच वर्षों में नहीं हुआ। मनीष के मुताबिक गुरुवार 20 मई को हरदोई, दरिया गंज और उन्नाव में ओले गिरने से इन इलाकों में तो बहुत ज्यादा तबाही मची है। कई बागों में तो 80 प्रतिशत तक फसल बरबाद हो गई। हालांकि मलिहाबाद बचा रहा। मनीष ने कहा, "आम की फसल इतनी संवेदनशील होती है कि जरा सा कीड़ा पूरे के पूरे बाग बरबाद कर देता है। यही नहीं अगर छोटे ओले भी गिर जाएं तो काफी नुकसान हो जाता है, इस बार तो बड़े-बड़े बर्फीले पत्थर जैसे ओले गिरे हैं। मनीष ने कहा कि किसानों को कितना नुकसान हुआ है, इसका तो आंकलन फिलहाल नहीं किया गया है, लेकिन हां नुकसान करोड़ों में हुआ है, यह बात पक्की है।"
इस समय लखनऊ के बाजार में आम 50 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है। वहीं मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू व चेन्नई में तो दाम इससे भी ऊपर चल रहे हैं। खास बात यह है कि जो आम अभी बाजार में है, वो डाल का पका नहीं है। ये वही आम है, जो आंधी में गिर गया और केमिकल डाल कर पकाया गया है। जाहिर है, जब डाल का पका आम बाजार में आएगा तो उसके दाम कहीं ऊपर होंगे। हो सकता है आप पूरे मौसम में एक पेटी आम से ही संतष्टि कर लें।












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