'रिलायंस इंडस्ट्रीज को लाभ पहुंचाने के लिए बढ़ाई गई गैस कीमतें'
सरकार ने प्राकृतिक गैस का दाम 1.8 डॉलर प्रति यूनिट से बढ़ाकर 4.2 डॉलर प्रति यूनिट कर दिया है।
पार्टी ने अपने बयान में कहा, "सरकार द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के लिए तय की गई गैस की कीमत के अनुरूप प्राकृतिक गैस की कीमतों में दोगुना से ज्यादा की यह वृद्धि की गई है।"
पार्टी ने कहा, "सरकार का यह निर्णय आरआईएल की गैस के लिए बाजार बनाए रखने के उद्देश्य से प्रेरित है। सरकारी क्षेत्र की कंपनियों की गैस आरआईएल की गैस से कहीं सस्ती थी और यह विद्युत उत्पादक और खाद निर्माता कंपनियों के लिये आकर्षक थी।"
आरआईएल के आंध्रप्रदेश स्थित कृष्णा-गोदावरी बेसिन से बेची जा रही गैस की चर्चा करते हुए पार्टी ने कहा, "सरकार के लिए जन हित के बजाय एक व्यावसायिक समूह को लाभ दिलाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।"
सरकार के इस कदम से महंगाई में तेज वृद्धि होने की बात कहते हुए पार्टी ने कहा, "इस कदम से, बिजली और खाद के उपभोक्ताओं पर 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।"
पार्टी ने अपने बयान में आरएनआरएल और आरआईएल विवाद में सरकार की भूमिका के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय का विरोध का किया है। अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से घरेलू समझौते के मुताबिक 17 साल तक प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस 2.34 डॉलर प्रति यूनिट पर देने की मांग की थी लेकिन आरआईएल इसके लिए तैयार नहीं हुई।
उच्चतम न्यायालय ने अनिल अंबानी की कंपनी आरएनआरएल और मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल को गैस खरीददारी समझौते पर फिर से वार्ता करने का निर्देश दिया है और मामले को बंबई उच्च न्यायालय की कंपनी खंडपीड को सौंप दिया है।
देश के सबसे बड़ी कानून लड़ाई के तौर पर जानी गई इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यों मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी. सथशिवम की पीठ ने की।
जून 2005 में रिलायंस समूह के बटबारे के समय अंबानी भाइयों के बीच मां कोकिलाबेन द्वारा कराए गए समझौते की वैधता ही मामले का मुख्य केंद्र बनी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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