केंद्र के साथ कोई मतभेद नहीं : रमन सिंह (लीड-2)
चिदंबरम से मुलाकात के बाद सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "गृह मंत्री से विस्तार से और खुले मन से बातचीत हुई। हाल ही में दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमले सहित सभी मुद्दों पर उनसे चर्चा हुई।" दंतेवाड़ा हमले में 35 लोग मारे गए थे।
सिंह ने कहा, "नक्सलियों के खिलाफ नरम और गरम रवैया अपनाया जाना समानांतर रूप से चलता रहता है लेकिन इसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार, अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस तथा मेरे और चिदंबरम के बीच कोई मतभेद नहीं है। हम अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।"
नक्सलियों के खिलाफ हवाई हमले के उपयोग के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा, "घने जंगलों में सुरक्षाकर्मी घायल होते हैं और उन्हें तत्काल राहत पहुंचाना महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है और इस बारे में असहमत होने का कोई तर्क ही नहीं है।
इसके बाद नक्सलवाद को लेकर एकीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा फोरम की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में रमन सिंह ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट इसलिए चलाया गया है ताकि बस्तर क्षेत्र से नक्सलियों को भगाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में पूरे लौह अयस्क का संकर्षण नेशनल मिनरल डेवलप्मेंट कारपोरेशन, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया या छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलप्मेंट कारपोरेशन द्वारा किया जाता है। बस्तर के केवल 0.1 फीसदी क्षेत्र पर संकर्षण किया जाता है।
राज्य पुलिस के गुरिल्ला युद्ध लड़ने के लिए प्रशिक्षित नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इसके लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं।
उल्लेखनीय है कि सिंह ने बुधवार को नक्सलियों को सबसे बड़ा आतंकवादी करार दिया था और कहा था कि नक्सलवाद देश में आतंकवाद का सबसे घिनौना स्वरूप है।
सिंह ने कहा था कि नागरिकों को मारना, सार्वजनिक परिवहन साधनों को निशाना बनाना, स्कूल बसों को निशाना बनाना, 'जन अदालतों' के माध्यम से लोगों को सजा देना और उन्हें मारना-पीटना एक तरह का आतंकवाद ही है।
नक्सली समस्या से रातों-रात नहीं निपटा जा सकता, इसके लिए दीर्घकालीन रणनीति बनानी होगी और साथ ही लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई के लिए भी तैयार रहना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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