नक्सलियों ने वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया (राउंडअप-इंट्रो)

पिछले महीने की छह तारीख को हुए हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी नक्सली विद्रोही रमन्ना ने पुलिसकर्मियों पर और हमले करने की धमकी देते हुए मंगलवार को कहा कि क्षेत्र से सुरक्षा बलों को हटाए जाने तक वार्ता संभव नहीं है।

बस्तर क्षेत्र के एक अज्ञात स्थान से एक समाचार चैनल से बातचीत में रमन्ना ने कहा, "भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं और जब तक उन्हें नहीं हटाया जाता तब तक वार्ता नहीं हो सकती।"

रमन्ना ने कहा, "हथियार छोड़ने का सवाल ही नहीं है। सुरक्षा बलों की ज्यादती दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। सोमवार को हमने बस को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उसमें पुलिस बल के जवान सवार थे। मैं आम लोगों की मौत के लिए खेद प्रकट करता हूं, लेकिन हम पूरे देश में पुलिस को निशाना बनाते रहेंगे।"

उधर, बिहार, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में नक्सलियों के 48 घंटे के बंद के कारण मंगलवार को जनजीवन प्रभावित हुआ। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने बंद के मद्देनजर राज्य में और नक्सली हमलों की आशंका जताई है। राज्य के दंतेवाड़ा जिले में सोमवार को हुए नक्सली हमले में कम से कम 35 लोग मारे गए थे।

छत्तीसगढ़ में बंद से बस्तर क्षेत्र, राजनांदगांव के कुछ हिस्सों में तथा रायपुर व धमतरी के ग्रामीण इलाकों में जनजीवन बाधित हुआ है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार सड़कों पर यात्री बसें नहीं चल रहीं। बस्तर के कई क्षेत्रों में जंगल से होकर गुजरने वाली सड़कों पर लकड़ी के लट्ठे रखकर नक्सलियों ने सड़क मार्ग बाधित किया।

बस्तर क्षेत्र के मुख्यालय जगदलपुर में कार्यरत एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "बस्तर में पूर्ण आतंक जैसी स्थिति है। नक्सली हमले की आशंका को देखते हुए लोग डरे हुए हैं।"

नक्सलियों के बंद के मद्देनजर पांचों राज्यों में कई रेलगाड़ियों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके मार्ग बदल दिए गए हैं।

बिहार में पुलिस ने बंद को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए हैं। पूर्व मध्य रेलवे ने पलामू एक्सप्रेस सहित छह रेलगाड़ियों को बुधवार तक रद्द कर दिया गया है, जबकि टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस सहित पांच रेलगाड़ियों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है।

बंद के कारण राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया है, जबकि पटना से लंबी दूरी तक जानें वाली बसों की संख्या भी कम हो गई है। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों को सतर्क कर दिया है। राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) पी़ क़े ठाकुर ने बताया कि पूर्व की घटनाओं को देखते हुए रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

उड़ीसा में भी नक्सलियों के बंद के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। राज्य परिवहन के साथ-साथ निजी कंपनियों ने भी बस सेवा रोक दी है। राज्य के दक्षिणी जिलों गजपति, मलकानगिरी और रायगढ़ में बंद का व्यापक असर देखा गया।

झारखण्ड में भी नक्सलियों के दो दिवसीय बंद के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है। नक्सलियों के बंद के मद्देनजर कई रेलगाड़ियों को या तो रद्द कर दिया गया है या उसके मार्ग बदल दिए गए हैं।

रेलवे ने राज्य से गुजरने वाली आठ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया है और नौ के मार्ग बदल दिए हैं। जिन रेलगाड़ियों को रद्द किया गया है, उसमें पलामू एक्सप्रेस प्रमुख हैं। इसके अलावा हावड़ा-जबलपुरशक्तिकुंज एक्सप्रेस और रांची व वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस के मार्गो में परिवर्तन किया गया है।

पश्चिम बंगाल में नक्सलियों के बंद के कारण पश्चिमी मिदनापुर, पुरुलिया और बांकुरा जिले में जनजीवन सबसे अधिक प्रभावित हुआ। ये तीनों जिले नक्सल प्रभावित हैं।

पुलिस ने इन तीनों जिलों के जंगली इलाकों से लगे राष्ट्रीय और राज्य मार्गो पर सतर्कता बढ़ा दी है। पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक मनोज वर्मन ने आईएएनएस से कहा कि बेलपहाड़ी, बिनपुर और लालगढ़ पुलिस थानों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।

इस बीच नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने कहा कि यदि नक्सली 72 घंटे के लिए भी हिंसा को रोक दें तो उनके साथ वार्ता शुरू की जा सकती है। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सुरक्षा बलों को हवाई निगरानी की सुविधा भी देने का समर्थन किया।

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के एक बस को निशाना बनाने के एक दिन बाद समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन पर चिदंबरम ने कहा, "मैं नहीं सोचता कि नक्सली कभी वार्ता के हमारे प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक प्रतिक्रिया देंगे।"

उन्होंने कहा, "मैं अब वार्ता का प्रस्ताव रख रहा हूं। नक्सलियों को कहना चाहिए कि हम हिंसा स्थगित करेंगे और वास्तव में जो तिथि तय करें उससे 72 घंटे के लिए वास्तव में हिंसा रोकें। हम 72 घंटे के भीतर मुख्यमंत्रियों का समर्थन लेंगे और प्रतिक्रिया देंगे।"

चिदंबरम ने कहा, "हम वार्ता के लिए तिथि, स्थान और समय तय करेंगे और नक्सली वार्ता के लिए आएं और उनकी जो भी इच्छा है उस पर बात करें।"

चिदंबरम ने वार्ता का ताजा प्रस्ताव रखते हुए कहा कि यदि वे 72 घंटे के लिए हिंसा बंद कर वार्ता के लिए राजी होते हैं तो उनको स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली स्टेशनों और टेलीफोन लाइनों को निशाना नहीं बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का सवाल ही नहीं उठता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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