प्रणब ने गठबंधन की समस्याएं स्वीकारीं
मुखर्जी ने समाचार चैनल टाइम्स नाउ से कहा, "गठबंधन में समस्याएं हैं, जिनसे इंकार नहीं किया जा सकता।" मुखर्जी ने यह बात ऐसे समय में कही है, जब संप्रग ने अभी अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला वर्ष पूरा किया है।
मुखर्जी ने कहा कि संप्रग के प्रथम कार्यकाल (2004-09) के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए एक बेहतर स्थिति यह थी कि सरकार के पास वामपंथियों की ओर से 60 सदस्यों का ठोस समर्थन था।
मुखर्जी ने कहा, "संप्रग के प्रथम कार्यकाल के दौरान हमारे लिए अच्छी बात यह थी कि हमें 60 वामपंथी सांसदों का एकमुश्त समर्थन हासिल था। लेकिन संप्रग के दूसरे कार्यकाल के दौरान कांग्रेस को कई छोटी पार्टियों पर निर्भर रहना है।"
लेकिन मुखर्जी ने यहीं पर विपक्ष की चुनौती को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा, "विपक्ष की एकता बेमानी है। यह मुद्दों पर आधारित है, यह स्थायी नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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