भारत को प्रमुख वरीयता देश का दर्जा मिले: पूर्व पाक वित्त मंत्री
भारत-पाक व्यापार सम्मेलन में बोलते हुए बर्की ने कहा, "भारत को प्रमुख वरीयता वाले देश का दर्जा न देने का फैसला पूरी तरह गलत है। इसके लिए राजनीतिक कारण जिम्मेदार हैं। इसमें बदलाव होना चाहिए।"
ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की शिक्षा प्राप्त और विश्व बैंक के उपाध्यक्ष रह चुके बर्की ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "अमेरिका ने यह दर्जा चीन को दिया हुआ है और पाकिस्तान को भी भारत को यह दर्जा देना चाहिए।"
भारत 1996 में पाकिस्तान को प्रमुख वरीयता देश का दर्जा दे चुका है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में देश एक दूसरे को इस तरह की वरीयता का दर्जा देकर आपसी व्यापारिक संबंधों को मज़बूत बनाते हैं, यह दर्जा देकर वे एक-दूसरे के उत्पादों पर कर छूट और कोटा बढ़ाकर व्यापार में बढ़ोतरी करते हैं।
बर्की के मुताबिक इस तरह का दर्जा देने से दोनों देशों के उद्योग समूहों में विश्वास का माहौल बनेगा और लोगों की मानसिकता को बदलने में मदद मिलेगी।
वर्ष 2000-01 के 25 करोड़ डॉलर की तुलना ने 2007-08 में भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार 2.3 अरब डॉलर तक बढ़ा था लेकिन 2008-09 में यह घटकर 1.8 अरब डॉलर रह गया। एक अनुमान के मुताबिक दोनों देशों के बीच सालाना 10 अरब डॉलर के व्यापार की संभावनाएं हैं।
अनुमान है कि बड़ी तादाद में भारत के उत्पाद खाड़ी देशों और सिंगापुर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications