अफजल की याचिका पर भाजपा ने स्पष्टीकरण मांगा

पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी ने मीडियाकर्मियों से कहा कि देश के लोग जानना चाहते हैं कि गुरु की दया याचिका पर दिल्ली सरकार या केंद्रीय गृह मंत्रालय फैसला लेगा।

जम्मू एवं कश्मीर के सोपोर का निवासी गुरु 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले के षड्यंत्र में शामिल होने का दोषी पाया गया। एक स्थानीय अदालत ने दिसंबर 2002 में उसको मौत की सजा सुनाई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी अक्टूबर 2003 में उसकी मौत की सजा को सही ठहराया।

आतंकवादी हमले के षड्यंत्र में भूमिका को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने भी अगस्त 2005 में उसकी सजा को बरकरार रखा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सोमवार को एक अखबार में छपी इस खबर का खंडन किया कि गृह मंत्रालय ने उनको एक स्मरण पत्र भेजकर गुरु की दया याचिका पर टिप्पणी भेजने को कहा है। इसके बाद भाजपा की प्रतिक्रिया सामने आई।

दीक्षित ने इस बारे में संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, "मुझे कोई पत्र नहीं मिला।"

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद गुरु की पत्नी तबस्सुम ने राष्ट्रपति के समक्ष एक दया याचिका दायर की। निर्धारित प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति ने दया याचिका पर गृह मंत्रालय का दृष्टिकोण मांगा।

प्रक्रिया के अनुसार दया याचिका पर गृह मंत्रालय उस राज्य का भी रुख जानेगा जिसकी सीमा में हुए अपराध के लिए मृत्युदंड दिया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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