मोदी की धर्मनिरपेक्ष छवि पेश करने में जुटे आडवाणी
आडवाणी ने सोमवार को अपने ब्लॉग पर किए ताजा पोस्ट में सच्चर समिति की रिपोर्ट से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत कर भरसक यह साबित करने का प्रयास किया कि मोदी की जिस कट्टर छवि को विरोधियों द्वारा प्रचारित और प्रसारित किया जाता रहा है, वास्तव में वह ऐसे हैं नहीं। बल्कि वह धर्मनिरपेक्ष हैं और दूसरे राज्यों की अपेक्षा गुजरात के मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति बेहतर है।
आडवाणी ने कहा, "केंद्र सरकार ने अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए सच्चर समिति गठित की थी लेकिन इसके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने देश की जनता के समक्ष यह साबित किया है कि अन्य राज्यों के मुकाबले गुजरात में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में मुसलमान बहुत बेहतर स्थिति में हैं।"
उन्होंने कहा, "सच्चर समिति द्वारा पेश 400 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में मुसलमानों में साक्षरता की दर 73.5 फीसदी है जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 59.1 है। इसमें भी शहरी पुरुषों की साक्षरता दर 76 फीसदी और ग्रामीण पुरुषों की साक्षरता दर 81 फीसदी है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 70 और 62 फीसदी है। यहां तक कि गुजरात के शहरी क्षेत्रों की मुस्लिम महिलाओं में साक्षरता की दर राष्ट्रीय औसत से पांच अंक अधिक है।"
आडवाणी ने कहा, "शिक्षा के मामले में भी गुजरात के मुसलमान अन्य राज्यों की अपेक्षा बेहतर स्थिति में हैं। प्राथमिक स्तर की शिक्षा हासिल करने वालों में गुजरात के मुसलमानों का आंकड़ा 74.9 फीसदी है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 60.9 फीसदी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह आंकड़ा महज 42.2 फीसदी है।"
सच्चर समिति के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक परिप्रेक्ष्य में भी गुजरात के मुसलमान अन्य राज्यों से बेहतर है। "गुजरात के शहरी क्षेत्रों के मुसलमानों की प्रति व्यक्ति औसत आय 875 रुपये हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों की औसत आय 804 रुपये है। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की प्रति व्यक्ति आय महज 662, पश्चिम बंगाल में 748, पंजाब में 811, आंध्र प्रदेश में 803 और कर्नाटक में 837 रुपये हैं।"
उन्होंने कहा कि गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मुसलमानों की प्रति व्यक्ति अन्य राज्यों के मुसलमानों के मुकाबले 20-25 फीसदी अधिक है। राज्य के ग्रामीण मुसलमानों में प्रति व्यक्ति आय 668 रुपये है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी आय 553 रुपये ही हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1987-88 के दौरान गुजरात में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले मुसलमानों की संख्या 54 फीसदी थी वहीं 2004-05 के दौरान यह आंकड़ा 34 फीसदी पहुंच गया। गुजरात के 5.4 फीसदी मुसलमान सरकारी नौकरियों में हैं जबकि पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 2.1 फीसदी, दिल्ली में 3.2 और महाराष्ट्र में 4.4 फीसदी है।
आडवाणी ने कहा कि गुजरात के बारे में हमेशा से ही यह दुष्प्रचार फैलाया जाता रहा है कि यहां के मुसलमानों के साथ राज्य सरकार अन्याय कर रही है। सच्चर समिति द्वारा प्रस्तुत आंकड़े साबित करते हैं कि गुजरात के मुसलमान शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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