अमेरिकी खुफिया तंत्र पाकिस्तान, अफगानिस्तान में सक्रिय
वाशिंगटन, 16 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी सेना के अधिकारी रक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादियों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अब भी निजी जासूसों का उपयोग कर रहे हैं।
समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' ने एक अमेरिकी अधिकारी और एक व्यापारी के हवाले से कहा कि इन कार्यो की वैधता पर चिंता के बावजूद शीर्ष सैन्य अधिकारी लगातार एक निजी खुफिया तंत्र पर भरोसा कर रहे हैं जिसने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के भीतरी इलाकों से सैकड़ों रपटे दी हैं।
इस वर्ष के आरंभ में सरकारी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सेना ने सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) और विशेष संचालन दस्ते के अवकाश प्राप्त अधिकारियों के एक दल को सूचनाएं हासिल करने के लिए इलाके में भेजा था।
इन सूचनाओं का उपयोग संदिग्ध आतंकवादी माने गए लोगों की पीछा करने और उनकी हत्या के लिए किया गया। मामले की जांच शुरू होने पर इसे शीघ्रता से बंद कर दिया गया।
अखबार ने कहा कि यह तंत्र अब भी न केवल काम कर रहा है वरन तालिबान के शीर्ष नेताओं से जुड़ी उनकी रिपोर्ट को तकरीबन रोजाना ही शीर्ष कमांडरों के सामने पेश किया जाता है।
पेंटागन के नियमों के अनुसार पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सेना को निजी जासूसों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं है।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र के शीर्ष कमांडर जनरल डेविड पेट्रस ने जनवरी 2009 में इस कार्यक्रम को बंद करने का आदेश दिया था।
परंतु टाइम्स ने पाया कि निजी जासूसों के उपयोग की गतिविधियां पहले की ही तरह चल रही हैं।
पेंटागन के प्रेस सचिव ज्योफ मोरेल ने कहा कि इस मामले की रक्षा विभाग के कई कार्यालय जांच कर रहे हैं और इसलिए कोई टिप्पणी करना उपयुक्त नहीं होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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