अमेरिकी नागरिक की शरण याचिका की जांच का निर्देश
न्यायमूर्ति पी.सथशिवम और न्यायमूर्ति एच.एल.दत्तू की खण्डपीठ ने वाहनवती से कहा कि याची केंद्र सरकार से राहत चाहता है और इसलिए उन्हें इस मामले में उचित कार्रवाई करने की कोशिश करनी चाहिए।
वाहनवती ने अदालत से कहा कि वह नीबेल द्वारा दायर की गई याचिका के बारे में पता लगाएंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जुलाई की तारीख तय कर दी।
अमेरिकी जीवन शैली और अमेरिका की सैन्यवादी नीतियों के प्रति निराशा जाहिर करने वाले जेफ नीबेल मित्रों के बीच 'मुक्त यात्री' के नाम से प्रसिद्ध हैं और शिमला में गांधी आश्रम से जुड़े हुए हैं।
इस 72 वर्षीय अमेरिकी नागरिक का कहना है कि उसने 19 जून, 2009 को राजघाट पर अपना पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र फाड़ कर फेंक दिया था और उसके बाद से वह नागरिकता विहीन व्यक्ति हो गए हैं।
वर्ष 1995 से शिमला में निवास कर रहे नीबेल को पासपोर्ट फाड़ने तथा अमेरिकी नीतियों के खिलाफ बोलने के बाद अमेरिकी प्रतिशोध का डर पैदा हो गया है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि अमेरिकी नीतियां सैन्य मशीन और विध्वंस पर आधारित हैं, जो एक दिन इस सुंदर धरती को खा जाएंगी। नीबेल ने खुद को महात्मा गांधी के अहिंसा दर्शन का अनुयायी और पालन करने वाला बताया।
नीबेल ने भारत आने से पहले अपनी पूरी संपत्ति अमेरिका में दान कर दी थी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में शरण पाने के लिए एक याचिका दायर की। वहां से कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया ताकि वह उन्हें शरण देने के लिए सरकार को आवश्यक निर्देश दे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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