नक्सली हिंसा पर बुद्धिजीवियों की चुप्पी पर माकपा बिफरी

नक्सलियों द्वारा शुक्रवार को पश्चिमी मिदनापुर और पुरुलिया जिले में पांच माकपा कार्यकर्ताओं की हत्या की आलोचना करते हुए माकपा पोलित ब्यूरो ने कहा कि इस वारदात ने एक बार फिर नक्सलियों की असली प्रकृति को उजागर कर दिया है।

माकपा की तरफ से कहा गया, "केवल पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अभियानों के खिलाफ बोलकर नक्सलियों का समर्थन करने वाले नागरिक अधिकार समूहों और बुद्धिजीवियों को इस सवाल का जवाब अवश्य देना चाहिए कि क्या वह नक्सलियों द्वारा राजनीतिक विरोधियों की लगातार की जा रही हत्याओं का भी समर्थन करते हैं?"

पोलित ब्यूरो के बयान में कहा गया कि नक्सलियों की इन वारदातों ने उनके इन प्रचारों को झूठा साबित कर दिया है कि वे लोग आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गो के हितों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं।

पार्टी के अनुसार लोकसभा चुनावों के बाद तीन जिलों पश्चिमी मिदनापुर, पुरुलिया और बांकुरा जिलों में नक्सलियों ने माकपा के 121 सदस्यों और कार्यकर्ताओं को मार डाला है। इनमें से ज्यादातर आदिवासी और गरीब पृष्ठभूमि के थे।

माकपा ने मारे गए कामरेडों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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