मध्य प्रदेश में घर देंगे 'गरीबी' की गवाही
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में 61 लाख गरीब परिवार हैं जबकि उन्हें केंद्र से सिर्फ 41 लाख परिवारों के लिए ही खाद्यान्न मिल रहा है, लिहाजा उन्हें प्रत्येक परिवार को मिलने वाले खाद्यान्न मे कटौती करना पड़ती है।
चौहान स्वीकारते है कि कई ऐसे लोग हैं जो सम्पन्न होने के बावजूद गरीबी रेखा से नीचे का कार्ड बनवाए हुए हैं और सुविधा का लाभ ले रहे हैं, इसलिए सरकार का विचार है कि बीपीएल कार्डधारियों के घरों के बाहर इसको दर्ज किया जाए।
सदन के बाहर संवाददाता सम्मेलन मे चौहान ने कहा कि बीपीएल कार्डधारी के घर के बाहर इसे दर्ज कराने का मकसद यह है कि सम्पन्न लोग शर्मिदगी महसूस करेंगे और अपना नाम इस सूची से कटवा लेंगे। वे यह मानने को तैयार नहीं है कि इससे गरीबी का मजाक उड़ेगा।
जागृति जानजाति संगठन की माधुरी कहती है कि सरकार की यह कोशिश सीधे तौर पर गरीबी का मजाक है। उनका मानना है कि सरकार अगर बाकई में गरीब को उसका हक दिलाना चाहती है तो उसे बीपीएल सूची में गलत नाम जुड़वाने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। घर के बाहर गरीब लिखने से क्या होगा, वे बोर्ड उखाड़ देंगे और लिखा हुआ मिटा देंगे।
मालूम हो कि प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में 2009 में गरीब परिवारों के घर के बाहर 'मैं गरीब हूं' लिखने की पायलट परियोजना शुरू हुई थी, जिसके भारी विरोध के चलते जिला प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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