साही के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
लखनऊ, 13 मई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उत्तर प्रदेश इकाई के नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए सूर्य प्रताप साही के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। उनके सामने प्रदेश में हाशिए पर पहुंच चुकी भाजपा में फिर से जान फूंकने की बड़ी चुनौती है।
साही भूमिहार जाति से पहले ऐसे नेता हैं, जिन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले अध्यक्ष पद पर ब्राह्मण और ठाकुर जाति के नेता काबिज रहे हैं।
कहा जा रहा है कि साही को उत्तर प्रदेश की कमान सौंप कर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा सिर्फ ब्राह्मणों और ठाकुरों की पार्टी नहीं है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के देविरया जिले से आने वाले साही, कल्याण सिंह के करीबी रहे हैं और उनके नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में गृह और आबकारी मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
साही पूर्वी उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले रमापति राम त्रिपाठी का स्थान लेंगे। साही के अलावा अध्यक्ष पद की दौड़ में लखनऊ के महापौर दिनेश शर्मा और मेरठ से सांसद राजेंद्र अग्रवाल थे। माना जा रहा है कि अपनी साफ-सुथरी छवि और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) से निकटता के कारण वह दौड़ में इन नेताओं से आगे निकल गए।
11 दिसम्बर 1952 को देविरया में जन्मे साही 1985 में पहली बार कुशीनगर जिले की कस्यां विधानसभा सीट से विधायक बने थे। 1991 और 1996 में भी वह इसी सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इस दौरान वह भाजपा की अगुवाई वाली राज्य सरकार में मंत्री बनाए गए।
साही 1971 में छात्र जीवन से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं। शुरुआत से ही वह आरएसएस के भी सदस्य रहे हैं। उनका परिवार भारतीय जन संघ से जुड़ा रहा है। साही 2005 से लगातार पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे हैं।
गौरतलब है कि बुधवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी द्वारा उन्हें उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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