धूम्रपान छुड़ाने की वैक्सीन बनाने में जुटा प्रवासी भारतीय
उत्तरी कैरोलिना प्रांत के डरहम शहर में स्थित 'वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर' से जुड़े प्रदीप कुमार गर्ग ने 'ड्यूक विश्वविद्यालय मेडिकल सेंटर' के अपने सहयोगियों की मदद से इस संबंध में काम शुरू कर दिया है।
गर्ग इसके लिए 'पोजीट्रॉन इमिशन टोपोग्राफी' (पीईटी) नाम की तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इसके जरिए वह छवियों के माध्यम से यह पता लगाने के प्रयास में हैं कि धूम्रपान के दौरान शरीर के कौन-कौन से अंगों में कितनी मात्रा में निकोटीन पहुंचता है।
गर्ग ने कहा, "इस शोध का मूल मंत्र यह है कि हम मस्तिष्क में पहुंचने वाली निकोटीन की मात्रा को रोकने के प्रयास में हैं। यह एक कारगर प्रयास होगा। इसके लिए यह जानने का प्रयास जारी है कि आखिर क्या कारण है कि हर आदमी में निकोटीन पर आश्रित रहने की क्षमता अलग-अलग होती है।"
निकोटीन पर अत्यधिक रूप से आश्रित रहने वाले लोगों के लिए गर्ग और उनके साथी एक ऐसी वैक्सीन तैयार करना चाहते हैं, जो मरीज के शरीर में एंटीबॉडी समाहित करेगी। यह एंडीबॉडी खुद को निकोटीन के साथ जोड़ लेगी और उसे मस्तिष्क तक पहुंचने से रोकेगी।
इससे निकोटीन पर आश्रित रहने वाले व्यक्ति को धूम्रपान कम रोचक और आनंददायक लगेगा। गर्ग का प्रयास फिलहाल जारी है और उन्हें आशा है कि वह अपने प्रयास में सफल रहेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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