नेपाल में खतरे में है टैगोर की कृतियां
काठमांडू, 10 मई (आईएएनएस)। भारत में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के अवसर पर जहां साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत रविवार से हो गई वहीं नेपाल में इस महान कलाकार की कुछ दुर्लभ पेंटिंग्स खतरे में है।
काठमांडू स्थित 'सिद्धार्थ कला दीर्घा' की निदेशक संगीता थापा ने कहा, "नेपाल में सार्वजनिक स्थलों पर टैगोर की तीन से चार पेंटिग्स हैं। बहुत कम लोगों को इन अनमोल पेंटिग्स की जानकारी है। मुझे डर है कि कहीं इसकी चोरी न हो जाए।"
थापा ने कहा एक जमाने में नेपाल के बुद्धिजीवी और कला प्रेमी कोलकाता, वाराणसी और इलाहाबाद जाते थे। उन्होंने कहा कि राणा प्रधानमंत्रियों को कलाकृतियों का संग्रह करने का शौक था और वे कोलकाता से पेंटिग्स लाते थे।
थापा ने कहा कि नेपाल में रवीन्द्रनाथ और उनके भतीजे अवीन्द्रनाथ की कलाकृतियों का संग्रह है। नेपाल के राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रकाश रिमाल ने थापा से संपर्क किया था और उनसे कहा कि उनके पास टैगोर की कुछ पेंटिंग्स हैं, जिन्हें वह बेचना चाहते हैं।
थापा ने कहा कि रिमाल के पास कुछ ऐसी पेंटिंग्स हैं, जिन्हें गुरुदेव ने खुद उनके दादा सूर्य प्रसाद उपाध्याय को भेंट किया था। उपाध्याय उस वक्त कोलकाता में रहते थे।
थापा ने इन अमूल्य पेंटिग्स की कीमत पता करने के लिए उसे इंटरनेट पर डाला। जबाव में विश्व भारती विश्वविद्यालय का एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें पेंटिंग्स बेचने के लिए मना किया गया। थापा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने कहा कि भारत में टैगोर की पेंटिग्स बेचने पर पाबंदी है, जिस वजह से इसे बेचा नहीं जा सकता।
थापा ने कहा, "मैंने विश्वविद्यालय को जवाब भेजा कि यह संप्रभु व स्वतंत्र नेपाल है और यहां पेंटिंग्स बेचने पर रोक लागू नहीं होगी।" उन्होंने कहा कि इन विवादों के बीच रिमाल ने पेंटिग्स बेचने की योजना छोड़ दी और वह अमेरिका चले गए।
थापा ने कहा कि उन्हें पता है कि टैगोर की कुछ अनमोल पेंटिंग्स कहां हैं लेकिन वह इसका खुलासा तभी करेंगी, जब उन्हें नेपाल सरकार इस बात से आश्वस्त करेगी कि इन पेंटिग्स को सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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