कोबरा से खेलता है 6 वर्ष का जीतेन्द्रनाथ
जहरीले सांप पकड़ना और नचाना सपेरा समाज का पुस्तैनी धंधा है। इस समाज के लोगों के पास कोई जमीन-जायदाद नहीं है। झुग्गी-झोपड़ी में बसे कुनबे सरकारी योजनाओं से महरूम हैं। पांच साल के बाद मां-बाप बच्चों को बीन बजाने और जहरीले सांप पकड़ने का हुनर सिखाना शुरू कर देते हैं।
शंकरगढ़ इलाके का श्यामनाथ अपने 6 साल के बेटे जीतेन्द्रनाथ को सांप नचाने की कला सिखा रहा है। स्कूली बस्ते की जगह उसकी पीठ पर जहरीले सांपों से भरी पिटारी व नाजुक हाथों में बीन थमा दी गई है।
बाप-बेटे इन दिनों बांदा जिले के अतरा व बिसड़ा कस्बे में अपना धंधा करते हैं। श्यामनाथ बताता है कि 'इस काम के अलावा उसके पास दूसरा कोई चारा नहीं है। सरकारी बंदिश इसे भी छीन रही है।' बेटे को स्कूल भेजने के सवाल पर वह कहता है कि 'अगले साल शादी करनी है। बीन बजाने की कला में फेल हुआ तो सगाई टूट जाएगी।'
जीतेन्द्रनाथ का हौंसला कम बुलंद नहीं है। अब तक वह लगातार ढाई घंटे बीन बजाने का रियाज कर चुका है। जहरीले सांपों की प्रजातियां उसकी जुबान पर हैं। असम में पाया जाने वाला सुआ पंखी नाग, नेपाल में गांजा के पेड़ों में पाया जाने वाला मोर पंखी, नागालैंड की बाल वाली नागिन, महाराष्ट्र की रंग बदलने वाली जुल्फ नागिन, राजस्थान का रक्तवंशी नाग व तक्षक नाग के खतरों से लोगों को सावधान करने का उसे हुनर प्राप्त है।
इसके एवज में तमाशबीन उसे एक-दो रुपए इनाम में देते हैं। सांप व विषखोपर पकड़ने में उसे अभी से महारत हासिल है। बांबी में घुसे कोबरा नाग को पकड़ने के लिए वह पहले काफी देर तक बीन बजाता है, बाहर निकलते ही पल में पकड़ कर अपनी पिटारी में बंद कर लेता है। फिर जहर की थैली निकाल कर उसे लोगों के बीच नचाता है।
यह बाल संपेरा बताता है कि अब तक वह 50 से अधिक जहरीले सांप पकड़ चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications