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सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुकेश अंबानी के हक में गया

By Jaya Nigam
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Mukesh Ambani, Anil Ambani
नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस और अनिल अंबानी की कंपनी आरएनआरएल के कृष्णा-गोदावरी बेसिन विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फैसला सुनाने वाली न्यायिक बेंच में केजी बालकृष्णन सहित तीन न्यायाधीश शामिल थे।

6 सप्ताह में करें निबटारा

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को दो बिंदुओं के तहत सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने गैस की कीमत पर झगड़ रहे दोनों भाइयों को ताकीद किया कि प्राकृतिक संसाधनों पर सिर्फ और सिर्फ भारत सरकार का अधिकार है। इसलिए इस संदर्भ में उनका झगड़ा व्यर्थ है। दूसरे बिंदु के तहत सुप्रीम कोर्ट ने दोनों भाइयों को आपस में मामला सुलझाने की नेक सलाह देते हुए इस समस्या के समाधान के लिए 6 सप्ताह का समय मुकर्रर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में शुक्रवार को कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर सरकार का अविवादित स्वामित्व है और इनकी कीमतें निर्धारित करने का अधिकार भी उसी के पास है।

मुकेश के हक में रहा फैसला

शेयर बाजार की ओर से मिल रहे संकेतों के माध्यम से इस फैसले को मुकेश अंबानी के पक्ष में समझा जा रहा है। फैसला आने से पूर्व आज शेयर बाजारों में काफी सुस्ती नोटिस की गयी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का इस मसले पर फैसला आने के बाद रिलायंस के शेयरों में मजबूती दिखी।

अनिल को लगा तगड़ा झटका

अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (आरएनआरएल) के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ छह हफ्तों के भीतर आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से गैस आपूर्ति के मामले में समझौता होना चाहिए।

विवाद का मुख्य कारण

अंबानी बंधुओं के बीच चल रहे इस विवाद की तह में रिलायंस साम्राज्य के बंटवारे के समय किया गया पारिवारिक फैसला है। अंबानी बंधुओं की मां कोकिला बेन की द्वारा करवाए गए पारिवारिक समझौते में तय हुआ था कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज आने वाले 17 सालों तक रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (आरएनआरएल) को रोजाना 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति 2.34 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से करेगी। लेकिन रिलायंस ने समझौते के कुछ समय बाद ही तय मबूल्य पर गैस उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया और रआरएनआरएल से कहा कि वह सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही गैस कंपनी को गैस सप्लाई करेगी। यह समझौता जून 2005 में रिलायंस समूह के बंटवारे के समय तैयार करवाया गया था।

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