आतंकवादी कसाब को सजा-ए-मौत (लीड-3)
विशेष अदालत ने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने सहित चार अन्य मामलों में कसाब को मौत की सजा सुनाते हुए कहा कि उसे जीवित रहने का अधिकार नहीं है।
विशेष अदालत के न्यायाधीश एम. एल. ताहिलयानि ने फैसला सुनाते हुए कहा, "मौत होने तक उसे फांसी पर लटकाया जाए।"
उन्होंने कहा कि यदि कसाब को जीवित छोड़ा जाएगा तो आम आदमी का अदालत से भरोसा उठ जाएगा। उसे जीने का अधिकार नहीं है। "मौत की सजा आवश्यक है।"
अदालत ने 23 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक कसाब को सोमवार को दोषी करार दिया था। दो अन्य आरोपियों फहीम और सबाउद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। कसाब पर कुल 86 आरोप तय किए गए थे जिसमें से पांच में उसे आजीवन करावास की सजा हुई है।
आर्थर रोड जेल में बनी विशेष अदालत से बाहर आते हुए मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त हिमांशु राय ने कहा कि मामले की बेहतरीन जांच और ठोस सबूत जुटाने के लिए विशेष न्यायाधीश ने पुलिस की पूरी जांच टीम को बधाई दी है।
फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने जब कसाब से पूछा कि उसे कुछ कहना है तो वह दोनों हाथ जोड़कर चुपचाप खड़ा हो गया। इससे पता चलता है कि उसे फैसला स्वीकार है।
फैसला सुनाए जाने के दौरान न्यायाधीश ने कसाब से कहा कि यदि वह पानी पीना चाहता है तो कुछ समय के लिए वह कटघरे से बाहर जा सकता है। न्यायाधीश ने मीडियाकर्मियों से भी कहा कि वे कक्ष से बाहर न जाएं।
न्यायाधीश ताहिलयानि ने कहा कि कसाब मुजाहिदीन का सदस्य है। उसने नौ अन्य लोगों के साथ निर्दोष लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कसाब सिर झुकाए हुए था। न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के वकील से भी कहा कि क्या कसाब कुछ कहना चाहता है। इस पर कसाब ने अपना सिर हिलाकर न में जवाब दिया।
अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए अभियोजन पक्ष के विशेष वकील उज्जवल निकम ने संवाददाताओं से कहा कि कसाब को चार मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई है। इसमें देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मामला भी शामिल है। पांच अन्य मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
फैसले के बाद निकम बेहद खुश थे। उनकी इस खुशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब वह कैमरों के सामने पहुंचें तो अपनी विजयी मुस्कान नहीं छिपा सके और 'विक्टरी' के संकतों से उन्होंने इसका प्रदर्शन भी किया।
निकम ने कहा, "फैसले से मैं बहुत खुश हूं क्योंकि पीड़ितों के घाव भरने की मेरी कोशिश सफल हुई है। परिवारों के आंसू पोंछने का काम हमारी पुलिस और अभियोजक एजेंसियों ने किया है।"
उन्होंने कहा, "यह मामला हमारे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हमने गरिमापूर्ण तरीके से यह मुकदमा चलाया और दुनिया के समक्ष एक मिसाल खड़ी की।"
उल्लेखनीय है कि कसाब की सजा को लेकर गत मंगलवार को अदालत में जिरह हुई थी, जिसमें निकम ने कसाब को 'शैतान' और 'हत्या की मशीन' करार देते हुए कहा था कि वह मृत्युदंड का पात्र है।
उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर, 2008 की रात पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुंबई के विभिन्न स्थानों पर हमला बोला था। लगभग 60 घंटे तक इन आतंकवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच चले संघर्ष में 166 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 244 घायल हो गए थे।
इन 10 आतंकवादियों में से नौ को मार गिराया गया था जबकि कसाब को जिंदा पकड़ने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली थी। इन आतंकवादियों ने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस स्थित वर्ल्ड हैरिटेज बिल्डिंग, ताजमहल पैलेस, टॉवर होटल, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल और नरीमन हाउस को निशाना बनाया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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