हिमाचल में स्ट्रॉबेरी के उत्पादन में गिरावट की संभावना
शिमला, 5 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के निचले पहाड़ी इलाकों में अप्रैल महीने के दौरान असामान्य गर्मी पड़ने से स्ट्रॉबेरी के उत्पादकों को अब चिंता सताने लगी है। स्ट्रॉबेरी की पैदावार में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल 50-60 फीसदी की कमी आ सकती है।
राज्य के बागवानी विभाग के अनुमानों के मुताबिक पिछले साल स्ट्रॉबेरी की 448 टन पैदावार के मुकाबले इस साल उसकी पैदवार 200 टन तक हो सकती है। वर्ष 2007-08 के दौरान स्ट्रॉबेरी का उत्पादन 480 टन था।
बागवानी विभाग के निदेशक गुरदेव सिंह ने आईएएनएस को बताया कि स्ट्रॉबेरी के मौसम (मार्च-मई) के शुरुआत में संभावनाएं अच्छी थीं। अप्रैल महीने के दौरान असामान्य तौर गर्मी पड़ने से फसलों को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने बताया, "हमारे अनुमान के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले इस साल स्ट्रॉबेरी की पैदावार में 50-60 फीसदी की कमी आ सकती है।"
विभाग के उपनिदेशक वी. के. शर्मा ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती होने वाले इलाकों खासकर सिरमौर जिले में अप्रैल महीने के दौरान औसत से अधिक तापतान होने की वजह से पैदावार पर असर पड़ सकता है।
शिमला मौसम कार्यालय के मुताबिक अप्रैल महीने के दौरान पूरे राज्य में तापमान औसत से दो से चार डिग्री अधिक था।
मौसम कार्यालय के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया, "सिरमौर जिले में तापमान औसत से तीन डिग्री सेल्सियस अधिक था।"
उन्होंने बताया कि अप्रैल महीने के दौरा जिले में बहुत कम बारिश हुई। समामान्य तौर पर 17.3 मिमी के मुकाबले इस बार 4.4 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। जिले में 75 फीसदी कम बारिश हुई है।
स्ट्रॉबेरी उत्पादक संजय अग्रवाल ने बताया, "कम से कम 60 फीसदी पैदावार में कमी की वजह असामान्य रूप से तापमान का बढ़ना है। वहीं जो फसल बचे हैं उसमें रस की मात्रा बहुत कम हैं।"
वहीं शर्मा ने बताया, "हिमाचल में हाल के दिनों में स्ट्रॉबेरी की खेती काफी लोकप्रिय हो रही है। स्ट्रॉबेरी के उत्पादन में अन्य फलों की तुलना में तेजी से नकदी प्राप्त होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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