न्याय के लिए 16 वर्षो से लड़ रही 92 वर्षीय विधवा
नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। व्हील चेयर पर बैठने को मजबूर और आंखों में आंसू लिए एक 92 वर्षीय विधवा 16 साल से अपने बेटे और एक रिश्तेदार के हत्यारे के खिलाफ न्याय पाने की लड़ाई लड़ रही है।
वर्ष 1994 में पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर अमर कौर के बेटे और उनके एक रिश्तेदार की हत्या कर दी थी।
कौर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूनम चौधरी के समक्ष उपस्थित हुईं और उन्होंने सवाल खड़ा किया कि लुधियाना के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें पंजाब सतर्कता विभाग का प्रमुख कैसे नियुक्त कर दिया गया?
आरोपी के वकील द्वारा मामले को और लंबा खींचने की रणनीति अपनाए जाने की आलोचना करते हुए कौर ने पिछले हफ्ते बयान दर्ज कराया।
कौर ने कहा, "मैं 92 साल की हो चुकी हूं और कभी भी मर सकती हूं। यह सैनी के लिए अच्छी खबर होगी और उनके लिए यह मामला आसान हो जाएगा।"
उन्होंने कहा, "सैनी के खिलाफ आपराधिक मामले होने के बावजूद वह पंजाब के राज्य सतर्कता ब्यूरो का मुख्य निदेशक है।"
कौर ने बताया, "मामले की सुनवाई शुरू हो गई है, लेकिन उनके ओहदे को लेकर कोई सवाल खड़ा करने वाला कोई नहीं है। हमने इस मामले में मंत्रियों को पत्र लिखे, परंतु कुछ नहीं हुआ।"
उन्होंने यह भी बताया कि वह राज्य और केंद्र सरकार को भी पत्र लिख चुकी हैं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
सैनी के अलावा सेवानिवृत्त हो चुके तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) सुखमोहिंदर सिंह संधू, तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) परमजीत सिंह, जो अब उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) हैं और सेवानिवृत्त तत्कालीन एसएचओ बलबीर चंद तिवारी आरोपियों में शामिल हैं।
कौर के मुताबिक उनके व्यवसायी बेटे विनोद कुमार और दामाद अशोक कुमार का लुधियाना के तत्कालीन एसएसपी सैनी के साथ विवाद हो गया था जिसमें विनोद और अशोक ने सहयोग करने से इंकार कर दिया था।
इसके बाद सन 1994 में सैनी ने दोनों को वित्तीय अनियमितताओं के मामले में फंसा दिया। पुलिस ने विनोद, अशोक को उनके वाहन चालक सहित हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें लापता घोषित कर दिया।
कौर का आरोप है कि उन दोनों की हत्या कर दी गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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