वित्त विधेयक को लोकसभा की मंजूरी (राउंडअप)
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों से जनता को कोई राहत नहीं दी। उन्होंने हालांकि ऑटो, शोध, स्वास्थ्य, इस्पात, पेपर और रियल्टी सेक्टर में करों में छूट जरूर दी।
मुखर्जी ने कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर आयात और उत्पाद कर बढ़ाने के फैसले को वैश्विक स्थिति के आधार पर न्यायोचित ठहराया और कहा कि खुदरा कीमतों को नहीं छेड़ते हुए उन्होंने एक सही कदम उठाया है।
लोकसभा में मौजूदा वित्तीय वर्ष के वित्त विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए मुखर्जी ने कहा, "करों के बजाय मैं प्रशासकीय उपायों के मार्ग का उपयोग कर सकता था। परंतु मैंने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि यह सही नहीं होता।" विधेयक ध्वनि मत से पारित हुआ।
उन्होंने कहा कि करों में वृद्धि का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि इसमें राज्यों को केंद्रीय करों में 32 प्रतिशत हिस्सेदारी के तहत 26,000 करोड़ रुपये मिलेंगे।
विपक्ष द्वारा तेल मंत्रालय की मांगों के खिलाफ लाए गए कटौती प्रस्ताव के गिरने के बाद मुखर्जी ने यह टिप्पणी की।
मुखर्जी ने 26 फरवरी को बजट पेश करते हुए कच्चे तेल पर पांच प्रतिशत, डीजल और पेट्रोल पर 7.5 प्रतिशत और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर पांच प्रतिशत आयात कर लगाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने पेट्रोल और डीजल पर एक रुपये प्रति लीटर उत्पाद कर बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा था।
उन्होंने कहा है कि घरेलू और विदेशी हवाई यात्राओं की इकोनॉमी श्रेणी पर सेवा कर बहुत कम होगा और इसकी राशि क्रमश: 100 रुपये और 500 रुपये से अधिक नहीं होगी।
मुखर्जी ने कहा कि इसका असर बहुत कम होगा और पूर्वोत्तर की हवाई यात्राओं पर सेवा कर में छूट दी गई है।
मुखर्जी ने 26 फरवरी को पेश बजट प्रस्तावों में हवाई यात्राओं की इकोनॉमी श्रेणी को भी सेवाकर के दायरे में लाने को कहा गया था। सरकार ने बिजनेस और प्रथम श्रेणी की हवाई यात्रा पर पहले ही सेवा कर लगा रखा है।
उन्होंने कॉफी उत्पादकों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की वहीं स्वास्थ्य, ऑटो और रियल्टी क्षेत्र में करों में छूट भी दी। उन्होंने 11 दवाइयों पर सीमा शुल्क घटाने की भी घोषणा की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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