अंतत: राज्यपाल से नहीं मिले भाजपा विधायक (लीड-2)
इससे पहले, बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा को उसके नेतृत्व में सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद भाजपा में रांची से दिल्ली तक बैठकों का दौर आरंभ हो गया। पार्टी की ओर से पहले तो साफ कहा गया कि वह समर्थन वापसी के अपने फैसले पर अडिग है लेकिन शाम होते-होते उसने राज्यपाल से मिलने का समय लेकर दो बार उसे टाल दिया।
पार्टी की ओर से गुरुवार सुबह 11 बजे समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल को सौंपा जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
भाजपा नेता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्यपाल से मिलने नहीं पहुंचे। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास ने बताया, "हम राज्यपाल से नहीं मिल सके क्योंकि इस सरकार में बतौर मंत्री शामिल भाजपा के बैजनाथ राम दिल्ली में हैं। उनके रांची लौटने के बाद हम राज्यपाल से मिलने का समय मांगेंगे।" दास ने कहा कि उनकी पार्टी समर्थन वापसी के फैसले पर कायम है।
भाजपा सूत्रों की ओर से हालांकि कहा गया कि सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन के उस प्रस्ताव के बाद भाजपा ने समर्थन वापसी का फैसला टाल दिया है जिसमें भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनाने को कहा गया था। हेमंत ने इस बारे में एक पत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को भेजा है। हेमंत ने बुधवार को भाजपा से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
उधर, दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे ने कहा, "यदि सरकार बनाने की कोई संभावना दिखी तो पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है।"
इसके बाद लगभग सात बजे भाजपा के दो विधायक राजभवन पहुंचे और फिर राज्यपाल को इस बात से अवगत कराया कि पार्टी के विधायक आज उनसे नहीं मिल सकेंगे इसलिए वे क्षमा चाहते हैं।
प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर आगे की रणनीति के लिए दिल्ली में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर बैठक आयोजित की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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