टाइटलर मुद्दे पर दोनों सदनों में हंगामा (लीड-1)
राज्यसभा में अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि दंगों के बाद न जाने कितने आयोग और कितनी समितियां बनी लेकिन आज तक किसी भी पीड़ित को न्याय नहीं मिल सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को सजा दिलाने को लेकर सरकार ने ढिलाई बरती है। उन्होंने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग की।
इस पर उप सभापति के. रहमान खान ने अकाली सांसदों से इस मामले पर नोटिस देने को कहा। इसके बाद अकाली दल के सदस्य उनके आसन के निकट पहुंच कर हंगामा करने लगे। हंगामा बढ़ता देख उप सभापति ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश से आधे घंटे पहले दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
उधर, लोकसभा में शून्यकाल के दौरान अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर ने यह मामला उठाते हुए कहा कि सीबीआई ने टाइटलर को कानून के चंगुल से बचने में मदद की।
कौर ने कहा, "सीबीआई 'कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन' के रूप में काम कर रही है। सरकार ने आधिकारिकयों मशीनरी का दुरुपयोग किया है।" उन्होंने कहा कि दंगों के दो दशक बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा, "वर्ष 1984 की घटना न सिर्फ दुखद बल्कि शर्मनाक भी है।" उन्होंने कहा कि अकाली दल के लोगों को इस मामले पर राजनीतिक रोटियां नहीं सेंकनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को इन दंगों के संदर्भ सीबीआई की एक रिपोर्ट स्वीकार करते हुए टाइटलर को बरी कर दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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