13 अरब डॉलर के स्पेक्ट्रम घोटाले का आरोप
उस दौरान नई कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस और स्पेक्ट्रम का आवंटन प्रथम आओ, प्रथम पाओ के आधार पर किया जाता था और आवंटन की दरें 2001 की थीं।
विपक्षी पार्टियों के अनुसार परिणामस्वरूप स्वान टेलीकॉम जिसने आवश्यक स्पेक्ट्रम के साथ ही 13 सर्किल्स के लिए 34 करोड़ डॉलर में लाइसेंस खरीदे थे, उसने तत्काल बाद यूएई की एटिसैलट को 90 करोड़ डॉलर में अपनी 45 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी थी।
इसके चलते इसकी कागजी कीमत बढ़ कर दो अरब डालर हो गई। जबकि अभी एक भी ग्राहक कंपनी के पास नहीं थे।
इसी तरह रियलटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी यूनीटेक ने मात्र 36.50 करोड़ डॉलर लाइसेंस शुल्क का भुगतान किया था, लेकिन उसने नार्वे की टालेनोर को बाद में 1.36 अरब डॉलर में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। इस तरह इसकी कीमत बढ़ कर 2 अरब डॉलर हो गई। जबकि न तो कंपनी के पास अभी कोई उपभोक्ता था और न कोई नेटवर्क ही।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है, "दरअसल सरकार को जितनी पूंजी इससे मिल सकती थी, उसका छठां हिस्सा ही उसके हाथ आ पाई है। इस तरह मात्र स्वान और यूनीटेक से अकेले राजकोष को 100 अरब रुपये का नुकसान हुआ है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। े












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