खुफियागिरी के आरोप में भारतीय महिला राजनयिक गिरफ्तार (लीड-3)
आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि गुप्ता (53) को ऐसे समय में गिरफ्तार किया गया है, जब भूटान के थिंपू में 28-29 अप्रैल को आयोजित दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) शिखर बैठक के संदर्भ में चर्चा करने के लिए उन्हें चार दिनों पहले ही दिल्ली तलब किया गया था।
गुप्ता जैसे ही हवाई अड्डे पर उतरीं उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।
गुप्ता की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने थिंपू में कहा, "हमारे पास इस बात पर विश्वास करने की वजह है कि इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में कार्यरत एक अधिकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को गुप्त सूचनाएं मुहैया करा रही है।"
प्रकाश ने कहा, "मामला फिलहाल जांच के अधीन है। महिला अधिकारी हमारी जांच एजेंसियों को सहयोग कर रही है।"
दूसरी ओर एक पुलिस सूत्र ने आईएएनएस को बताया, "आरोपी माधुरी गुप्ता को पूर्वी दिल्ली स्थित उसके मकान से दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने जासूसी करने और महत्वपूर्ण दस्तावेज लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए जाने से पहले उसे हिरासत में रखा गया था और दो-तीन दिनों तक पूछताछ की गई थी।"
उन्होंने बताया, "वह पिछले कुछ वर्षो से पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चयोग की प्रेस व सूचना शाखा में कार्यरत थी। पिछले कुछ महीनों से उसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी।"
सूत्र ने बताया, "गुप्ता को सोमवार को अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।"
गृह सचिव जी. के. पिल्लई ने समाचार चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा, "हम इस खबर का खंडन नहीं कर रहे हैं लेकिन यह गृह मंत्रालय के दायरे से ऊपर का मामला है।"
अन्य सूत्रों ने बताया है कि गुप्ता पर पिछले कुछ समय से निगरानी रखी जा रही थी और यह साबित होने के बाद कि उसने कुछ संवेदनशील जानकारियां लीक की हैं, उस पर कार्रवाई की गई।
गुप्ता मुख्य भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की सदस्य नहीं है बल्कि वह निचले कैडर यानी आईएफएस-बी में है।
गुप्ता 'विश्व मामलों के भारतीय संबंध परिषद' (आईसीडब्ल्यूए) के लिए भी काम कर चुकी है।
सप्रू हाउस के नाम से मशहूर आईसीडब्ल्यूए के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "उसने(माधुरी गुप्ता) बतौर सहायक निदेशक 2006-07 में यहां काम किया था।" आईसीडब्ल्यूए को भारतीय विदेश नीति के थिंक टैंक के रूप में जाना जाता है।
सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि गुप्ता को उर्दू भाषा में विशेषज्ञता हासिल थी और वह पाकिस्तान जाने के लिए उत्सुक थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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