भूटानी शरणार्थियों को घर वापसी की उम्मीद

भूटान के सबसे अधिक शरणार्थी नेपाल में रहते हैं। पूर्वी नेपाल के बंद शिविरों में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के निगरानी में 108,000 से अधिक भूटानी शरणार्थी रहते हैं। करीब 10 हजार शरणार्थी शिविरों के बाहर हैं।

नस्लीय आधार और बौद्ध धर्म से इतर धार्मिक संप्रदाय का होने के कारण इनको भूटान से बाहर कर दिया गया। युवा शरणार्थी अब पश्चिमी देशों में अपने जीवन के लिए नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।

अब तक करीब 30 प्रतिशत शरणार्थी नेपाल से निकलकर अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, डेनमार्क और नार्वे जैसे देशों में बस चुके हैं और आने वाले समय में और शरणार्थियों के ऐसा करने की उम्मीद है।

भूटान के शरणार्थी नेताओं ने अब आठों देशों के राष्ट्र प्रमुखों से अपने पुनर्वास के लिए बहुपक्षीय वार्ता शुरू करने का आग्रह किया है।

भूटान में लोकतंत्र के लिए निर्वासित राष्ट्रीय मोर्चे के अध्यक्ष बलराम पोडैल ने कहा कि शरणार्थियों के मुद्दे को सुलझाना दक्षेस समूह की नैतिक जिम्मेदारी है क्योंकि यह केवल भूटान का आंतरिक मामला नहीं हैं।

पोडैल ने कहा कि 25,000 से अधिक शरणार्थी भारत में और करीब 30,000 पूरी दुनिया में फैले हैं। अब यह एक क्षेत्रीय मुद्दा है।

नेपाल और भूटान शरणार्थी समस्या को सुलझाने के लिए 15 दौर की वार्ता कर चुके हैं लेकिन वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला और बातचीत टूट गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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