सोरेन को है अभी भी एक विधानसभा सीट की तलाश
सोरेन को 30 जून से पहले अपने लिए नई सीट तलाशनी है लेकिन उनके सामने एक बहुत जटिल समस्या मुंह बाए खड़ी है। उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का कोई भी विधायक अपने नेता के लिए अपनी सीट का परित्याग करने को तैयार नहीं है।
सोरेन की इस परेशानी के कारण राज्य सरकार में उनकी सहयोगी पार्टियां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) भी चिंतित है।
आजसू के नेता कमल किशोर भगत ने इस संबंध में कहा, "झामुमो एक महत्वपूर्ण फैसले में देरी कर रही है।"
सोरेन तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने 30 दिसंबर, 2009 को शपथ ग्रहण किया था और इस लिहाज से उन्हें संवैधानिक आधार पर किसी भी हालत में 30 जून से पहले राज्य विधानसभा की सदस्यता ग्रहण कर लेनी होगी।
सोरेन फिलहाल लोकसभा के सदस्य हैं और पिछले कुछ दिनों से लोकसभा की कार्यवाही में भी हिस्सा ले रहे हैं। दुमका सीट से सांसद सोरेन सोमवार को संसद में दिखे थे।
झामुमो के नेता साइमन मरांडी मानते हैं कि बारहट सोरेन के लिए सुरक्षित सीट हो सकता है। राज्य के मानव संसाधन विकास मंत्री हेमलाल मुर्मू इस सीट से विधायक हैं और मरांडी मानते हैं कि मुर्मू आसानी से अपनी सीट 'गुरुजी' के लिए छोड़ देंगे। यह मुर्मू का गुरुजी को 'गुरु दक्षिणा' होगा।
मुर्मू इसके लिए तैयार नहीं हैं। वह उलटे मरांडी को ही अपनी सीट का परित्याग करने को कह रहे हैं। मुर्मू ने कहा, "मरांडी भी तो विधायक हैं। वह क्यों नहीं अपनी सीट छोड़ देते?"
सोरेन के लिए दूसरी सुरक्षित सीट दुमका की हो सकती है। यहां से सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन विधायक हैं जबकि एक अन्य सीट भी है, जहां से सोरेन जीत सकते हैं। यह सीट जामा की है जहां से सोरेन की बहू सीता विधायक चुनी गई हैं।
हेमंत और सीता अपने पिता और ससुर के लिए अपनी सीटों का त्याग करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके जवाब में झामुमो के हर एक विधायक के पास रेडीमेड जवाब है। पार्टी के विधायक नलिन सोरेन करते हैं, "हमारे पास जब यह मुद्दा आएगा, तब हम इस पर विचार करेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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