अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अपनी भूमिका फिर परिभाषित करे : भारत

वाशिंगटन, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत ने बदलते समय के अनुसार भविष्य में वैश्विक वित्तीय संकट की चेतावनी और मजबूत तथा टिकाऊ विकास में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से अपना ढांचा और प्रशासन बदलने को कहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर डी.सुब्बाराव ने 186 देशों की संचालन समिति की बैठक में शनिवार को कहा, "विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों द्वारा उठाए गए ठोस और निर्णायक कदमों ने दुनिया को अप्रत्याशित वित्तीय संकट से उबरने में मदद की।"

आईएमएफ और विश्व बैंक की नियमित ग्रीष्मकालीन बैठक में उन्होंने कहा, "हमारे कदमों से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मजबूत हुआ और यह विश्वास मजबूत हुआ कि हम एकसाथ मिलकर दुनिया की वित्तीय स्थिरता कायम रख सकते हैं और स्थाई आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकते हैं।"

सुब्बाराव ने आईएमएफ द्वारा निगरानी में सुधार,संसाधनों में वृद्धि और कर्ज सुविधा में सुधार जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन की स्वीकार्यता, वैधता और स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए संगठनात्मक और प्रशासकीय सुधार आवश्यक हैं।

उभरते बाजारों और विकासशील देशों को कम से कम सात प्रतिशत कोटा हिस्सेदारी स्थानांतरित करने की मांग फिर दोहराते हुए सुब्बाराव ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों से ही वर्तमान आर्थिक वास्तविकता अधिक बेहतर तरीके से प्रदर्शित होगी और आईएमएफ की वैधता बढ़ेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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