लाजपत नगर मामले पर कश्मीर बंद

हड़ताल की वजह से घाटी के अधिकतर इलाक़ों में आम जनजीवन अस्त व्यस्त है, दुकानें बंद हैं और यातायात बुरी बाधित है. सरकारी और ग़ैर सरकारी दफ़्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति पर भी प्रभाव पड़ा है. पुलिस ने भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों की आशंका के मद्देनज़र श्रीनगर और इसके आसपास के अधिकतर इलाकों में अघोषित कर्फ़्यू लगा रखा है.
गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने 14 साल पहले शहर के एक भीड़भाड़ वाले लाजपत नगर बाज़ार धमाके के मामले में तीन दोषियों को फांसी और एक को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी. वर्ष 1996 में हुए इस धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी और 38 लोग घायल हुए थे. सभी दोषियों का संबंध कथित रुप से चरमपंथी संगठन जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ़्रंट से था.
आम कश्मीरी और अलगावादी नेताओं की सोच है कि जिन लोगों को इस धमाके के मामले में सज़ा दी गई है उन्हें ग़लत ढंग से फंसाया गया था. श्रीनगर में एक दुकानदार ने अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, "प्रत्येक कश्मीरी को आतंकवादी माना जाता है और अदालतें उन्हें फांसी देने के लिए उत्सुक हैं. वर्ष 2002 में गुजरात नरसंहार को अंजाम देने वालों को अब तक सज़ा नहीं दी गई है."
ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेंस (उदारवादी गुट) के अध्यक्ष मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ के अनुसार लाजपत नगर धमाके के मामले में दोषियों को बहुत कठोर सज़ा दी गई है. कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसीएशन के अध्यक्ष अब्दुल क़ैयूम ने आरोप लगाया कि अभियुक्तों को निष्पक्ष सुनावाई का मौक़ा नहीं दिया गया. बंद का आह्वान हुर्रियत कांफ़्रेंस के दोनों गुटों ने किया है.












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