झामुमो विधायकों को नक्सलियों का भय
दरअसल, झारखण्ड में इन दिनों नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट चल रहा है। ऐसे में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विधायकों को यह डर सता रहा है कि बदला देने की कार्रवाई के तहत नक्सली उन्हें निशाना बना सकते हैं। इसलिए ऐसे विधायकों ने राज्य सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की है।
भारागोड़ा के विधायक विद्युत बरन महतो, चाइबासा के विधायक दीपक बिरुआ और घाटशीला के विधायक रामदास सोरेन ने राज्य सरकार से अपने लिए अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।
तीनों विधायकों के चुनाव क्षेत्र पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जिले में आते हैं। इन क्षेत्रों को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है। झामुमो के 18 में से एक तिहाई विधायक नक्सल प्रभावित क्षेत्र से हैं।
महतो ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मुझे जो सुरक्षा दी गई है वह पर्याप्त नहीं है। मुझे अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों से मिलने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाना पड़ता है। मेरे क्षेत्र के नक्सलियों को पश्चिम बंगाल और उड़ीसा से सटे होने का फायदा भी मिलता है।" महतो की सुरक्षा के लिए पहले से ही तीन सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं।
झामुमो के विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "हमने राज्य सरकार को लिखकर मुख्यमंत्री का ध्यान अपनी सुरक्षा की ओर आकृष्ट किया है। ऑपरेशन ग्रीन हंट से नक्सलियों में नाराजगी है। ऐसे में वे हमें निशाना बना सकते हैं। हमें पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए।"
उल्लेखनीय है कि झारखण्ड के 24 में 18 जिले नक्सल प्रभावित है। वर्ष 2001 से अब तक नक्सली हिंसा में 1600 लोग मारे जा चुके हैं। यही नहीं कई निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी नक्सलियों के हाल के वर्षो में निशाना बनाया है।
वर्ष 2008 में नक्सलियों ने जनता दल (युनाइटेड) के विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या कर दी थी। इससे पहले वर्ष 2005 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माले के विधायक महेंद्र सिंह की हत्या हुई थी। वर्ष 2007 में जमशेदपुर से झामुमो के सांसद सुनील महतो की भी एक फुटबॉल मैच के दौरान हत्या कर दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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