नक्सलवाद आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा : प्रधानमंत्री (लीड-1)

राजधानी दिल्ली में पांचवें नागरिक सेवा दिवस का उद्घाटन करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "नक्सलवाद से देश की आंतरिक सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा है। हाल के दिनों की घटनाओं ने इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए तत्काल और सुनियोजित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है।"

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे।

उन्होंने कहा, "जिस किसी ने भी देश के लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती देने की कोशिश की उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।"

प्रधानमंत्री ने हालांकि इस अवसर पर स्वीकार किया कि विकास न पहुंच पाने के कारण इस समस्या ने विकराल रूप धारण किया है। उन्होंने कहा, "हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि जिन क्षेत्रों में नक्सलवाद प्रभावी है, वहां विकास नहीं हुआ। इन क्षेत्रों के अधिसंख्य लोग गरीब जनजातीय हैं। इन लोगों को समान रूप से विकास का लाभ नहीं मिला है।"

उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे महत्वाकांक्षी विकास कार्यक्रमों से देश का कोई भी भूभाग अछूता नहीं रहे।"

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अति महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "रोजगार और आय बढ़ाने, शिक्षा व स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना विकास, आवश्यक मूलभूत सुविधाएं और खाद्य सुरक्षा तथा जन वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अहम है।"

उन्होंने कहा, "यह आम धारणा है कि इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हमें अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल पाई है। इन कार्यक्रमों का लाभ जन-जन तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासनिक अधिकारियों के बड़ी चुनौती है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम आज जिन समस्याओं व चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे आजादी के बाद की समस्याओं व चुनौतियों से सिर्फ अलग ही नहीं है बल्कि उनसे जटिल भी होती जा रही हैं। हमारी आबादी जहां लगातार बढ़ रही है वहीं शहरीकरण भी बहुत हो गया है। लोग शिक्षित हो रहे हैं। उनकी आमदनी बढ़ी है। उनमें जागरूकता बढ़ी है और इन सबके चलते उनकी अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं।"

उन्होंने कहा, "देश की एकता व अखंडता को अंदर व बाहर से खतरा है। आतंकवाद और नक्सलवाद हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती दे रहे हैं। जलवायु परिवर्तन व पर्यावरण संबंधी समस्याओं से हम प्रभावित तो हो ही रहे हैं, आने वाली पीढ़ी पर भी इससे अछूती नहीं रह पाएगी।"

उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य नौ फीसदी विकास की दर हासिल करना है। इस लक्ष्य तक पहुंचने में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अहम है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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