तालिबान के गढ़ से नैटो सैनिक हटाए गए

अमरीकी सेना के जनरल स्टेनले मैक्क्रिस्टल ने पिछले साल कहा था कि सैनिकों की तैनाती की नई रणनीति बनाते समय वे कोरंगल घाटी के बारे में विचार करेंगे. उनका कहना था कि वे ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सेना आबादी वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करे. कोरंगल घाटी के बारे में कहा जाता है कि ये अफ़ग़ानिस्तान के सबसे ख़तरनाक इलाक़ों में से एक है. टीकाकारों के मुताबिक कोरंगल घाटी में पहाड़ियाँ हैं और छिपने के लिए कई ठिकाने भी जिस कारण तालेबान के छापामार युद्ध के तरीकों में ये घाटी मददगार साबित होती है.
ख़तरनाक इलाक़ा
कोरंगल में तालेबान और नैटो के बीच भीषण लड़ाई होती रही है. इस इलाक़े का इस्तेमाल तालेबान अफ़ग़ानिस्तान में हथियार और लड़ाके भेजने के लिए करता है. अफ़ग़ानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सेना के संयुक्त कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल डेविड एम रॉड्रिगेज़ ने एक बयान में कहा है, विद्रोहियों से लड़ने के लिए नई रणनीति बनाई गई है और अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के साथ मिलकर लिया गया नया फ़ैसला उसी के अनुरुप है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम कोरंगल या किसी अन्य इलाक़े में ज़रूरत पड़ने पर मदद नहीं कर सकते.
इस बीच अफ़गानिस्तान में तीस हज़ार अतिरिक्त सैनिक भी भेजे जा रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर सैनिकों को आबादी वाले इलाक़ों से तालेबान को निकालने के अभियान और आर्थिक विकास के लिए ज़रूरी सुरक्षा मुहैया करवाने के काम पर लगाया जाएगा. कोरंगल में 2005 में हुए हमले में अमरीकी नेवी स्पेशल फ़ोर्स के तीन लोग मारे गए थे जबकि उन्हें बचाने के लिए भेजे गए अमरीकी हेलीकॉप्टर पर भी हमला हुआ था जिसमें 16 अमरीकी सैनिकों की मौत हो गई थी.












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