पूर्वोत्तर में चक्रवात नहीं 'टोरनाडो' आया था!

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टोरनाडो एक प्रकार का तूफान होता है जिसमें हवाएं गोल-गोल नहीं बल्कि हाथी की सूढ़ की तरह लहरते हुए चलती हैं। टोरनाडो तब बनता है जब जमीन से गर्म हवा ऊपर की तरफ उठती है और ठंडी व शुष्क हवा से मिलती है। ऐसा ही कुछ मंगलवार की रात बिहार, असम और पश्चिम बंगाल में हुआ। डॉपलर रडार से मौसम के इस तेवर को मापा जाता है।
चैनल न्यूज़ एशिया डॉट कॉम में प्रकाशित खबर के मुताबिक कोलकाता के मौसम विभाग ने कहा है कि हो सकता है पिछले कई दिनों से तीनों राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी के गारण टोरनाडो बनने लगा हो। चूंकि यह अचानक आता है, लिहाजा डॉपलर रडार पहले से संकेत नहीं दे पाता है। जबकि चक्रवात में ऐसा नहीं होता। उसके संकेत 48 घंटे पहले से मिलने लगते हैं।
'अमंगलकारी' बन गई मंगलवार की रात
बिहार के अररिया जिले की नौ वर्षीय रुखसाना के सिर से मां का आंचल छिन गया तो पूर्णिया के बायसी प्रखंड के नागेंद्र की नवविवाहिता पुत्री नीतू की हथेलियों की मेंहदी का रंग भी हल्का न हुआ था कि वह काल के गाल में समा गई। यह कहानी केवल इन्हीं दोनों परिवारों की नहीं है। बिहार के पांच जिलों में मंगलवार रात आए तूफान ने कई लोगों के प्रियजनों को छीन लिया।
बायसी प्रखंड के नागेंद्र बताते हैं कि उस रात बड़ी अच्छी हवा चल रही थी। मैं अपनी बेटी के साथ घर के बाहर बैठा था। अचानक बहुत तेज हवा चलने लगी। वह उठकर घर के भीतर चली गई। तभी टीन की छत उस पर गिर गई और वह लहूलुहान हो गई और बाद में चल बसी। इसी तरह अररिया के सफीपुर गांव की रुखसाना और शाकिर की मां मुर्शिदा की मौत हो गई। शाकिर (12) ने बताया कि उस रात वह और रुखसाना मां के साथ सोए थे। आंधी आने के बाद दोनों पड़ोस में चले गए। इसी बीच उसकी मां मुर्शिदा के ऊपर छत गिर गई जिससे उनकी मौत हो गई।
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मजदूरी करने वाले शाकिर के पिता मोहम्मद अशफाक कहते हैं कि भले ही सरकार की तरफ से राहत के नाम पर कुछ मिल जाए लेकिन वह इन बच्चों की मां को कहां से लाएंगे। पूर्णिया के बायसी प्रखंड के आसज ग्राम पंचायत के टिंकू ने इस तूफान में अपनी मां, बाप और भाई सबको खो दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कई लोग लापता हैं।












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