जीएसएलवी के 6 प्रक्षेपणों में से केवल 2 सफल हुए

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 15 अप्रैल (आईएएनएस)। गुरुवार को विफल हुआ जीएसएलवी मिशन देश का छठा अभियान था। अब हुए छह जीएसएलवी प्रक्षेपणों में से केवल दो पूरी तरह और एक आशिंक रूप से सफल रहा है। बाकी प्रक्षेपण अपने मिशन को पूरा नहीं कर सके।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के दो जीएसएलवी मिशन वर्ष 2003 और 2004 में सफल हुए थे और जीसेट-2 और एजुसेट उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया था।

रॉकेट की वर्ष 2001 में हुई पहली उड़ान जीसेट-1 को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में विफल रही। सेटेलाइट को तय कक्षा की ऊंचाई तक नहीं पहुंचाया जा सका।

जीएसएलवी के वर्ष 2006 में हुए प्रक्षेपण के तुरंत बाद रॉकेट हवा में नष्ट हो गया। जीएसएलवी की वर्ष 2007 में हुई उड़ान को आंशिक रूप से सफल माना गया।

गुरुवार को हुई जीएसएलवी की उड़ान में रॉकेट के प्रक्षेपण के 300 सेंकेड बाद मुख्य क्रायोजेनिक इंजन चालू हुआ लेकिन उसके साथ लगे दो छोटे वर्नियर इंजन चालू होने में विफल रहे।

इस अभियान की लागत 350 करोड़ थी। भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान-डी3 (जीएसएलवी-डी3) रॉकेट शाम पांच बजे प्रक्षेपित किए जाने के मिनटों के भीतर अपने मार्ग से भटक गया।

इसरो के अध्यक्ष के.राधाकृष्णन ने कहा कि दो इंजनों के चालू नहीं होने के कारण रॉकेट अपने मार्ग से भटक गया।

जीसेट-4 उपग्रह के साथ दागे गए जीएसएलवी डी3 के 60 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद से ही संकेत मिलने बंद हो गए। रॉकेट से आंकड़ों का मिलना 505 सेकेंड के बाद बंद हो गया।

उन्होंने कहा कि क्रायोजेनिक इंजन के पास दो और वर्नियर इंजन थे। लगता है कि वे चालू नहीं हो पाए। इसका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।

राधाकृष्णन ने कहा कि एक स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन की मदद से अगले जीएसएलवी को एक वर्ष के भीतर प्रक्षेपित किया जाएगा।

राधाकृष्णन के इसरो का अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला प्रक्षेपण था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+