प्रधानमंत्री ने परमाणु सम्मेलन के नतीजों पर संतोष जताया
प्रधानमंत्री ने कहा, "सम्मेलन में स्वीकार किए गए प्रस्ताव और कार्य योजना से हम संतुष्ट हैं। इसे तैयार करने में भारत ने सक्रिय भागीदारी की।"
सिंह ने कहा, "यह एक महत्वपूर्ण मसला है क्योंकि परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना हम विकास गतिविधियों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग बढ़ाने में सक्षम नहीं होंगे।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक वैश्विक परमाणु ऊर्जा साझेदारी केंद्र की स्थापना करेगा। यह सरकारी नियंत्रण में होगा लेकिन अकादमिक अदान-प्रदान और शोध तथा विकास गतिविधियों के लिए खुला होगा। भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु सहयोग फिर शुरू होने के बाद दुनिया के साथ भारत की साझेदारी का यह अगला कदम है।
सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद और गुपचुप परमाणु प्रसार को सुरक्षा के लिए खतरा मानने के भारत के दशकों पुराने दृष्टिकोण को आज दुनिया में व्यापक स्वीकृति मिली है।
उन्होंने कहा कि भारत 1950 के दशक से ही परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए कह रहा है लेकिन उसकी आवाज को अनसुना कर दिया गया। आज दुनिया उसी परमाणु हथियारमुक्त दुनिया के दर्शन की ओर बढ़ रही है जिसे हमने विश्व के सामने रखा था।
प्रधानमंत्री ने अपने वाशिंगटन दौरे में ओबामा, राष्ट्रपति नजरबायेव, प्रधानमंत्री अब्बास फैजी, प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर, राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी और चांसलर एजेंला मार्केल से मुलाकात की।
सिंह ने कहा, "शिखर सम्मेलन के मेजबान ओबामा के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर लाभदायक चर्चा हुई। हम इस वर्ष के अंत तक भारत में ओबामा की मेजबानी करने के इच्छुक हैं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकोजी, मार्केल और हार्पर के साथ उनकी चर्चा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद अर्थव्यवस्था के सुधार में जी-20 की भूमिका पर केंद्रित रही।
सिंह ने कहा कि जून में जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वह फ्रांस जाएंगे और सरकोजी का इस वर्ष के अंत में भारत यात्रा का कार्यक्रम है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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