2020 तक बढ़ाया जा सकता है स्वास्थ्य मिशन
स्वास्थ्य सचिव के. सुजाथा राव ने यहां एक कार्यक्रम से इतर आईएएनएस से कहा, "इस योजना के अभी केवल पांच वर्ष पूरे हुए हैं और मुझे लगता है कि 15 वर्ष से कम अवधि में इसके वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हो सकेंगे।"
उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि भारत कितना विस्तृत देश है। हमने कुछ लक्ष्यों को हासिल किया है लेकिन अभी देश के बहुत से हिस्सों में इन्हें हासिल करना बाकी है। यदि आप ग्रामीण क्षेत्रों में जाएं तो वहां आपको वास्तविक स्थिति दिखाई देगी। बुंदेलखंड (उत्तर प्रदेश) में ही जाकर देखा जा सकता है कि वहां कितना काम करने की जरूरत है।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अप्रैल 2005 में इस योजना की शुरुआत की थी। शुरुआत में सात वर्षो का लक्ष्य रखा गया था लेकिन सस्ती स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के विशाल लक्ष्य को देखते हुए इस योजना को आठ साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
पिछले पांच सालों में इस परियोजना पर कम से कम 53,000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस योजना के तहत सरकार ने 700,000 मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या आशा (एएसएचए) की नियुक्तियां की हैं और देशभर में 10,000 से ज्यादा प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत की है।
इस ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से प्रत्येक 10,000 जन्मों पर मातृ मृत्यु दर 301 से घटकर 254 हो गई है। इसी तरह प्रत्येक 10,000 जन्मों पर शिशु मृत्युदर 58 से घटकर 53 हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को कहा था कि गांवों में अपर्याप्त सुविधाएं होने के चलते गरीब लोगों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है और वे कर्ज में दब रहे हैं। मेडिकल बिल चुकाने के लिए वे अपनी सम्पत्ति, घर और अन्य सामान बेच रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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