मनमोहन-ओबामा के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू (लीड-2)
वाशिंगटन, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार अपराह्न अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ द्विपक्षीय वार्ता शुरू कर दी। बैठक में मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता और फिलहाल अमेरिका में कैद डेविड कोलमैन हेडली के मामले के साथ ही पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद का मसला उठने की संभावना है।
इसके साथ ही बैठक में अफगानिस्तान में भारत की भूमिका सहित कई सारे क्षेत्रीय मुद्दों पर अमेरिका के साथ मतभेदों को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
व्हाइट हाउस के निकट स्थित राष्ट्रपति के अतिथि गृह, ब्लेयर हाउस में शुरू हुई यह बैठक पिछले साल नवंबर के बाद ओबामा और मनमोहन सिंह के बीच यह पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को चार दिवसीय यात्रा पर अमेरिका पहुंचे। वह यहां परमाणु सुरक्षा के मसले पर होने वाले शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस बैठक में 42 देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
रविवार को व्हाइट हाउस की मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी केपरिका मार्शल ने एंड्रयूज हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगवानी की। हवाई अड्डे पर अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित थीं।
दोनों नेता परमाणु आतंकवाद और परमाणु बम बनाने वाले खुदरा सामग्रियों पर अपनी साझी चिंताओं पर भी चर्चा कर सकते हैं।
बहु स्तरीय परमाणु कूटनीति के अलावा मनमोहन सिंह फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी, कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफेन हार्पर और कजाकस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव के साथ भी मुलाकात करेंगे।
डेविड कोलमैन हेडली का मामला राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल (अवकाशप्राप्त) जेम्स जोन की बैठक में भी उठने के आसार हैं।
अमेरिकी मूल के पाकिस्तानी हेडली का संबंध पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से है और उसने मुंबई हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की है। इस संबंध में भारतीय जांच एजेंसियां हेडली से पूछताछ करना चाहती हैं लेकिन अमेरिका की तरफ से जटिल कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है।
ओबामा के साथ मुलाकात में सिंह इस बात का आश्वासन दे सकते हैं कि भारत असैन्य परमाणु क्षतिपूर्ति विधेयक को लेकर प्रतिबद्ध है। हालांकि भारत में विपक्षी पार्टियां इस विधेयक का जोरदार विरोध कर रही हैं।
ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर ओबामा द्वारा भारत से समर्थन मांगे जाने की संभावना है हालांकि ईरान के साथ संबंधों को देखते हुए भारत का पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री कह सकते हैं कि बातचीत और कूटनीति से मसले का हल निकालने पर विचार किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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