'अफगान सरकार और तालिबान के बीच हस्तक्षेप कर रहा है अमेरिका'

वर्ष 2001 में अमेरिकी हमले के पहले तालिबान सरकार में मंत्री रहे और पाकिस्तान में राजदूत रहे मुल्ला अब्दुल सलाम जईफ ने ईटली की समाचार एजेंसी एकेआई के साथ शुक्रवार को एक विशेष बातचीत में कहा, "करजई कुछ करना चाहते हैं, लेकिन उनके पास कोई अधिकार नहीं है।"

जईफ ने कहा, "लोग चाहते हैं कि करजई अफगानिस्तान के लोगों के भविष्य की गारंटी के लिए कुछ करें। लोग यहां अमेरिका की उपस्थिति से निराशा महसूस करते हैं। वे वाकई में हर काम में हस्तक्षेप कर रहे हैं। सरकार में, व्यवस्था में और संविधान में, हर जगह।"

जईफ ने कहा, "सरकार के मंत्री तालिबान के साथ ईमानदार बातचीत नहीं कर रहे हैं।"

जईफ को वर्ष 2002 में पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया था। उसके बाद उन्हें क्यूबा में गुआंटानामो खाड़ी स्थित अमेरिकी सैन्य कारागार भेज दिया गया था। वहां वह 2005 तक कैद रहे थे।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के लोग अब खुद को तालिबान के साथ अपनी पहचान चाहते हैं।

जईफ ने कहा, "तालिबान कौन है? तालिबान मेरा बेटा है, तालिबान मेरा भाई है। तालिबान और मुझमें आखिर क्या अंतर है?"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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